भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन, SDO हटाए गए; DSP पर भी कार्रवाई

Rupa Kumari | July 25, 2026 | 02:22 PM IST

Samachar Post डेस्क, बिहार  : भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट द्वारा मृतक के परिजनों से मुलाकात के कुछ घंटों बाद ही प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई। इस क्रम में जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीओ संजीत कुमार को उनके पद से हटा दिया गया है, जबकि तत्कालीन एसडीपीओ रहे डीएसपी राजेश शर्मा पर भी कार्रवाई की गई है।

परिजनों से मुलाकात के बाद हुआ फैसला

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय का भरोसा दिलाया था। परिजनों ने मुलाकात के दौरान घटना की स्वतंत्र जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई थी। सरकार की ओर से की गई त्वरित कार्रवाई को इसी क्रम का हिस्सा माना जा रहा है। गृह विभाग के आदेश के अनुसार, डीएसपी राजेश शर्मा को मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो से हटाकर पुलिस मुख्यालय में प्रतीक्षारत पदस्थापन (वेटिंग फॉर पोस्टिंग) में भेज दिया गया है। हालांकि, सरकार की ओर से जारी कार्रवाई को जांच प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।

बाढ़ पीड़ितों के मुद्दों को उठाने का दावा

परिजनों का कहना है कि भरत तिवारी भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के आसपास बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सहायता राशि से जुड़े मुद्दों को उठाता था। उनका आरोप है कि वह कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहा था। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि इसी कारण उसे कई बार दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कुछ प्रशासनिक अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

पुलिस का पक्ष भी सामने आया

वहीं, पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियां और कथित धमकी भरे संदेश साझा कर रहा था। इसी से जुड़े मामलों में उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी। परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसका एनकाउंटर किया गया। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद से ही मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।

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जांच पर टिकी निगाहें

सरकार द्वारा SDO और DSP स्तर पर कार्रवाई किए जाने के बाद अब पूरे मामले की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं। फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई के बाद मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज कर दी है।

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