बहरागोड़ा के स्कूल में पेड़ कटाई को लेकर विवाद, मुखिया ने डीसी और वन विभाग से की शिकायत

Rupa Kumari | July 13, 2026 | 05:21 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड स्थित मानुषमुड़िया प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में वर्षों पुराने पेड़ों की कटाई और एक पुरानी सरकारी इमारत को ध्वस्त किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने विरोध जताते हुए प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की है। मानुषमुड़िया पंचायत के मुखिया राम मुर्मू ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जिले के उपायुक्त (डीसी) और वन विभाग को शिकायत पत्र भेजा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि विद्यालय परिसर में बिना आवश्यक अनुमति के पुराने आकाशिया और पोटास के पेड़ों को काट दिया गया, जो पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा गंभीर मामला है।

ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय परिसर में मौजूद पेड़ वर्षों पुराने थे और छात्रों को छाया के साथ-साथ पर्यावरणीय लाभ भी प्रदान करते थे। उनका आरोप है कि पेड़ों की कटाई और सरकारी भवन को तोड़े जाने से पहले स्थानीय लोगों को कोई जानकारी नहीं दी गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। मुखिया राम मुर्मू ने कहा कि बिना अनुमति पेड़ों की कटाई पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन हो सकता है। उन्होंने उपायुक्त और वन विभाग से मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी परिसरों में इस तरह की कार्रवाई बिना अनुमति के की जाएगी, तो पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

प्रधानाध्यापक ने दी सफाई

विवाद के बीच विद्यालय के प्रधानाध्यापक छोटा भुजंग टुडू ने पेड़ कटवाने के निर्णय का बचाव किया है। उन्होंने बताया कि संबंधित पेड़ पूरी तरह सूख चुका था और उसकी शाखाओं से नए भवन की छत पर लगातार गंदगी फैल रही थी। प्रधानाध्यापक के अनुसार छात्रों की सुरक्षा और विद्यालय परिसर की साफ-सफाई को ध्यान में रखते हुए पेड़ को हटाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि यह कदम किसी निजी लाभ के लिए नहीं बल्कि विद्यालय हित में उठाया गया था।

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जांच की मांग तेज

पेड़ कटाई और भवन ध्वस्तीकरण के मुद्दे पर अब गांव में चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करे कि पेड़ और भवन हटाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत हुई थी या नहीं। फिलहाल सभी की नजरें जिला प्रशासन और वन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

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