Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर रांची के अशोक नगर में सड़क और जमीन से जुड़े विवाद की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अशोक नगर रोड नंबर-1 में रहने वाले पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम और उनके परिवार से जुड़े मामले में सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। मरांडी ने पत्र में कहा है कि परिवार का दावा है कि वे इस जमीन पर कई दशकों से रह रहे हैं और उनके पास जमीन से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। मामले को लेकर परिवार की ओर से पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने पत्र में कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में पुलिस प्रशासन की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं रही है। हालांकि, ये आरोप संबंधित पक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अशोक नगर विवाद को लेकर पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम की ओर से भी शिकायत की गई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायत में रास्ता बंद करने और धमकी दिए जाने समेत कई आरोप लगाए गए हैं। मामले में एक वरिष्ठ IPS अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज होने की भी रिपोर्ट सामने आई है।

स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग
मरांडी ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र और उच्चस्तरीय एजेंसी से कराने का आग्रह किया है। उन्होंने पीड़ित परिवार को तत्काल पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी की है। उन्होंने कहा है कि यदि जमीन या रास्ते से जुड़े विवाद में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल या कानून के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
कई परिवारों ने भी उठाया रास्ते का मुद्दा
अशोक नगर रोड नंबर-1 के विवाद को लेकर सामने आई शिकायतों में सिर्फ एक परिवार ही नहीं, बल्कि आसपास के अन्य परिवारों की ओर से भी रास्ते के इस्तेमाल से जुड़ी समस्या उठाई गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पांच परिवारों ने भी मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में दावा किया गया है कि परिवार लंबे समय से इस रास्ते का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों और जमीन व रास्ते से जुड़े दस्तावेजों की जांच संबंधित स्तर पर की जानी है। मुख्यमंत्री कार्यालय या संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मांग पर क्या कार्रवाई होती है, यह आगे स्पष्ट होगा।


















