परिसीमन के विरोध में 30 अगस्त को रांची में आदिवासी महाजुटान, बंधु तिर्की ने की एकजुट होने की अपील

Rupa Kumari | August 19, 2026 | 12:25 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों में संभावित कटौती की आशंका को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे पर 30 अगस्त 2026 को रांची के मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता महाजुटान रैली आयोजित की जाएगी। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने इस महाजुटान का आह्वान करते हुए राज्यभर के आदिवासी समाज से बड़ी संख्या में रांची पहुंचकर अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की है।

परिसीमन सिर्फ सीमा निर्धारण नहीं, अधिकारों का सवाल

बंधु तिर्की ने कहा कि परिसीमन को केवल निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की तकनीकी प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार यह झारखंड के आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकारों और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2002 से 2008 के बीच हुई परिसीमन प्रक्रिया में झारखंड में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों की संख्या 28 से घटाकर 22 करने का प्रस्ताव सामने आया था। हालांकि व्यापक विरोध और राज्य की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए उस समय इस पर रोक लग गई थी।

केवल जनसंख्या को आधार बनाने का विरोध

बंधु तिर्की का कहना है कि आदिवासी बहुल राज्यों में परिसीमन के लिए केवल जनसंख्या को आधार बनाना उचित नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि झारखंड के पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों, ऐतिहासिक विस्थापन और बड़े पैमाने पर हुए पलायन को भी ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि खनन, उद्योग और बांध परियोजनाओं के कारण हजारों आदिवासी परिवार अपनी जमीन और गांव छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जिससे जनसंख्या का स्वरूप प्रभावित हुआ है। ऐसे में राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होना आदिवासी समाज के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग

पूर्व मंत्री ने कहा कि यदि परिसीमन के दौरान लोकसभा या विधानसभा सीटों की कुल संख्या बढ़ाई जाती है, तो अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ाई जानी चाहिए। उनका मानना है कि इससे आदिवासी समुदाय का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

आदिवासी विधायकों को लिखा पत्र

महाजुटान को व्यापक स्वरूप देने के लिए बंधु तिर्की ने विभिन्न दलों के आदिवासी विधायकों को पत्र लिखकर रैली में शामिल होने का आग्रह किया है। उन्होंने विधायकों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय के लोगों को रांची लाने के लिए आवश्यक परिवहन और अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें, ताकि राज्य के सभी हिस्सों की भागीदारी महाजुटान में दिखाई दे।

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तेज हो सकती हैं राजनीतिक गतिविधियां

30 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में प्रस्तावित इस रैली को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गतिविधियां तेज होने की संभावना है। आयोजकों का कहना है कि महाजुटान का उद्देश्य परिसीमन के संभावित प्रभावों को लेकर जागरूकता बढ़ाना और आदिवासी समाज के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक आवाज बुलंद करना है। आगामी दिनों में इस मुद्दे पर राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

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