Samachar Post रिपोर्टर, पाकुड़ : विजयादशमी के अवसर पर पाकुड़ के रेलवे मैदान स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में मां भवानी की प्रतिमा के समक्ष पारंपरिक विधि-विधान के साथ अस्त्र-शस्त्र पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, तिलक और रक्षा सूत्र के साथ संपन्न हुए इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने मां भवानी की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ पूजन
रेलवे मैदान स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में आयोजित अस्त्र-शस्त्र पूजन अनुष्ठान राणा शुक्ला और संतोष कुमार ठाकुर के सानिध्य में संपन्न हुआ। पुरोहित सजल चटर्जी ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना कराई। अनुष्ठान के दौरान अस्त्र-शस्त्रों पर तिलक लगाया गया और रक्षा सूत्र बांधकर विधि-विधान से पूजन किया गया। इस अवसर पर मौजूद श्रद्धालुओं ने मां भवानी के समक्ष शीश नवाया और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
शौर्य, साहस और कर्तव्य का प्रतीक है अस्त्र-शस्त्र पूजन
कार्यक्रम में संजय कुमार ओझा ने विजयादशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व सत्य, धर्म और न्याय की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अस्त्र-शस्त्र पूजन की परंपरा शौर्य, साहस, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति समर्पण का संदेश देती है। यह परंपरा धर्म की रक्षा करने और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा भी देती है।
आत्मरक्षा और सुरक्षा के प्रति जागरूकता पर दिया जोर
सामाजिक कार्यकर्ता अनिकेत गोस्वामी ने अस्त्र-शस्त्र पूजन के धार्मिक और सामाजिक महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने आत्मरक्षा और सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने ‘जय भवानी’, ‘जय दुर्गे’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्रीराम’ के जयकारे लगाए। दर्जनों श्रद्धालुओं की भागीदारी से आयोजन में धार्मिक उत्साह देखने को मिला। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से परंपरा, आस्था और कर्तव्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया।






















