Samachar Post रिपोर्टर, रांची : JSSC-CGL समेत अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में आज, 8 अक्टूबर को सुबह 11 बजे, फिर सुनवाई होगी। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में बुधवार को करीब साढ़े तीन घंटे तक मामले पर सुनवाई हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 8 अक्टूबर की तारीख तय की। अदालत ने फिलहाल प्रार्थियों को मिली अंतरिम राहत को अगले आदेश तक जारी रखा है। अब आज की सुनवाई में नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बहस आगे बढ़ेगी।
सरकार ने परीक्षा रद्द करने के फैसले को बताया उचित
बुधवार की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले को उचित बताया। सरकार की ओर से अदालत में एक सीलबंद रिपोर्ट भी पेश की गई। सरकार ने दलील दी कि परीक्षा में बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्य भी मिले हैं और अनुसंधान के दौरान लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। सरकार के अनुसार, मामले में अब तक 28 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सरकार का कहना है कि जांच अभी जारी है। ऐसे में यह स्पष्ट करना मुश्किल है कि किन अभ्यर्थियों की कथित अनियमितताओं में भूमिका रही और कौन अभ्यर्थी इससे पूरी तरह अलग हैं।

2500 सफल अभ्यर्थियों के हित पर कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने करीब 2500 सफल अभ्यर्थियों के हित को लेकर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि मेरिट के आधार पर सफल होकर नियुक्ति की स्थिति में पहुंचे अभ्यर्थियों के साथ न्याय होना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि व्यापक स्तर पर अनियमितता के आरोप होने मात्र से सभी अभ्यर्थियों को एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता। अदालत ने इस पहलू पर भी गौर किया कि जिन अभ्यर्थियों ने मेरिट के आधार पर सफलता हासिल की है, उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए।
CID जांच पूरी नहीं होने पर कोर्ट ने उठाए सवाल
करीब साढ़े तीन घंटे चली सुनवाई के दौरान प्रार्थियों और राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ताओं के बीच दलीलें हुईं। अदालत ने मौखिक रूप से सवाल किया कि जब मामले में CID की जांच अभी पूरी नहीं हुई है, तो परीक्षा रद्द करने का आधार क्या है। कोर्ट ने जांच की गति को लेकर भी सवाल उठाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि लंबे समय से अनुसंधान चल रहा है और केवल सीलबंद रिपोर्ट पेश कर परीक्षा रद्द करने के फैसले को उचित ठहराना पर्याप्त नहीं हो सकता। अदालत ने यह भी सवाल किया कि क्या नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला किसी दबाव में लिया गया है। इन मुद्दों पर आज की सुनवाई में भी दलीलें जारी रहने की संभावना है।
JSSC-CGL से JPSC और CDPO तक कई परीक्षाएं
मामले में अलग-अलग नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई हैं। रमेश उरांव और अन्य ने JSSC-CGL परीक्षा-2023 को रद्द करने की अधिसूचना को चुनौती दी है। वहीं सुभाष मुरमू और अन्य ने CDPO परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की है। आशीष अक्षत, आकांक्षा मिंज और अन्य ने JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने के फैसले को चुनौती दी है। इसके अलावा सौरभ सिंह और अन्य ने फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती रद्द करने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया है। अब सभी की नजरें गुरुवार सुबह 11 बजे होने वाली सुनवाई पर हैं, जहां अदालत दोनों पक्षों की दलीलों को आगे सुनेगी।




















