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गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की मौत के 2 महीने बाद भी कोर्ट में नहीं पहुंची डेथ रिपोर्ट, NIA केस में 11 तारीखें

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Samachar Post रिपोर्टर, रांची : गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पुलिस एनकाउंटर में मौत को करीब दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन तेतरियाखाड़ गोलीकांड मामले में उसकी मौत से संबंधित डेथ या पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक अदालत में पेश नहीं किए जाने का दावा किया जा रहा है। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की अदालत में अब तक 11 तारीखें पड़ चुकी हैं। सुजीत सिन्हा की 2 अगस्त 2026 को जेल शिफ्टिंग के दौरान पुलिस कार्रवाई में मौत हुई थी। उसे साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल ले जाया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, रास्ते में पुलिस वाहन का टायर पंचर होने के बाद गाड़ी बदली जा रही थी। इसी दौरान सुजीत सिन्हा के शौच जाने का बहाना बनाकर पुलिसकर्मी की राइफल छीनने और फायरिंग की कोशिश करने की बात सामने आई थी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई थी।

तेतरियाखाड़ गोलीकांड मामले में NIA ने दर्ज किया था केस

सुजीत सिन्हा का नाम लातेहार के बालूमाथ थाना क्षेत्र स्थित तेतरियाखाड़ कोलियरी में 18 दिसंबर 2020 को हुई आगजनी और गोलीबारी के मामले में सामने आया था। इस मामले की जांच NIA कर रही है। घटना के दौरान तेतरियाखाड़ कोलियरी में चार ट्रकों और एक बाइक को आग के हवाले किए जाने तथा गोलीबारी किए जाने की बात सामने आई थी। गोलीबारी में एक व्यक्ति घायल भी हुआ था। मामले में UAPA की विभिन्न धाराओं और क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट (CLA) एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। जांच में सुजीत सिन्हा के अलावा गैंगस्टर अमन साव और उसके गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई थी।

मौत के बाद भी केस में नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, सुजीत सिन्हा की मौत के बाद भी तेतरियाखाड़ मामले की सुनवाई के दौरान उसका नाम केस से हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। NIA की अदालत में 7 अगस्त, 21 अगस्त, 5 सितंबर, 9 सितंबर, 11 सितंबर, 14 सितंबर, 16 सितंबर, 18 सितंबर, 21 सितंबर, 23 सितंबर और 26 सितंबर को सुनवाई की तारीखें पड़ीं। इसके बावजूद उसकी मौत से संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। डेथ रिपोर्ट या पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अदालत के रिकॉर्ड में उसकी स्थिति को अपडेट किए जाने की जरूरत बताई जा रही है।

डेथ रिपोर्ट नहीं आने से अदालत की कार्यवाही पर असर?

रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया है कि जब मामले के एक आरोपी की मौत हो चुकी है, तो उसके संबंध में आवश्यक दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड में क्यों नहीं जोड़े गए। हालांकि, यह भी संभव है कि मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रहने के कारण अदालत में तारीखें पड़ रही हों। ऐसे में सुजीत सिन्हा की मौत से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज अदालत में पेश होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि केस रिकॉर्ड में उसके संबंध में आगे की प्रक्रिया क्या होगी।

पहले भी सामने आया था ऐसा मामला

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले नक्सली संगठन से जुड़े प्रशांत बोस उर्फ प्रशांत दा की मौत के मामले में भी पुलिस और NIA की ओर से अदालत में आवश्यक डेथ रिपोर्ट पेश करने में देरी का मुद्दा सामने आया था। तेतरियाखाड़ मामले में भी अब सुजीत सिन्हा की मौत से संबंधित दस्तावेज अदालत में पेश किए जाने का इंतजार है। इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हो सकता है कि NIA और पुलिस की ओर से उसकी मौत से जुड़े दस्तावेज कब रिकॉर्ड पर रखे जाते हैं।

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Meenu

Reporter  |  Samachar Post

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