सरायकेला में हाथियों का आतंक, जारगोडीह जंगल में 12-15 हाथियों ने डाला डेरा; धान की फसल बर्बाद

Meenu | August 24, 2026 | 02:01 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,सरायकेला : ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के जारगोडीह गांव के जंगल में 12 से 15 हाथियों का झुंड पहुंच गया है। सोमवार सुबह जंगल में हाथियों की मौजूदगी की सूचना के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण शाम ढलने के बाद घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। रात के दौरान हाथियों के झुंड ने कई गांवों के खेतों में पहुंचकर धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है।

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रातभर खेतों में मचाया उत्पात

ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों का झुंड रात में सालुकडीह, डुमरा, पिलीद और बिस्टाटांड़ गांव के खेतों से होकर गुजरा। इस दौरान हाथियों ने खेतों में लगी धान की फसल को रौंदकर बर्बाद कर दिया। ग्रामीणों का दावा है कि दर्जनों एकड़ में लगी फसल प्रभावित हुई है। धान की फसल तैयार होने के समय हुए नुकसान से किसानों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में हाथी कई बार घरों में रखे अनाज को भी निशाना बनाते हैं। भोजन की तलाश में हाथियों के घरों तक पहुंचने से लोगों में डर का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की मौजूदगी के कारण शाम के बाद गांव में निकलना मुश्किल हो गया है। आसपास के गांवों के लोग रास्ते में हाथियों से सामना होने की आशंका के चलते सतर्क रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, हाथी-मानव संघर्ष की घटनाएं लगातार चिंता का कारण बनी हुई हैं।

दलमा क्षेत्र से हाथियों के आने का दावा

ग्रामीणों का आरोप है कि दलमा क्षेत्र से हाथियों का झुंड भोजन और पानी की तलाश में ईचागढ़ इलाके की ओर पहुंच रहा है। उनका कहना है कि जंगल में पर्याप्त भोजन-पानी नहीं मिलने के कारण हाथी आबादी वाले क्षेत्रों और खेतों की ओर आ रहे हैं। हालांकि, हाथियों के इस तरह आने के वास्तविक कारणों की पुष्टि वन विभाग की निगरानी और जांच के बाद ही हो सकेगी।

वन विभाग की टीम निगरानी में जुटी

प्रभारी वनपाल कैलाश चंद्र महतो ने बताया कि हाथियों का झुंड कुटाम जंगल से जारगोडीह जंगल पहुंचा है। वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है और उन्हें आबादी वाले इलाके से दूर सुरक्षित स्थान की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

किसानों ने मांगा फसल का उचित मुआवजा

ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के कारण खेत से धान घर तक लाना भी चुनौती बन गया है। उनका आरोप है कि वन विभाग की ओर से कभी-कभी मशाल और पटाखे उपलब्ध कराकर ही कार्रवाई पूरी कर दी जाती है। प्रभावित किसानों ने फसल नुकसान का जल्द आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों ने हाथियों को आबादी से दूर रखने के लिए स्थायी व्यवस्था करने की भी मांग की है, ताकि लगातार बने हाथी-मानव संघर्ष के खतरे को कम किया जा सके।

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