Samachar Post रिपोर्टर, रांची : निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत के आदेश के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने अदालत को बताया कि विनय चौबे नवंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं। इसी मामले के अन्य आरोपी विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने एक सवाल के संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर टिप्पणी की कि बचाव पक्ष के वकील को भी मामले के तथ्यों की पूरी जानकारी नहीं है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि विनय चौबे एक प्रभावशाली अधिकारी रहे हैं और रिहाई के बाद वे मामले से जुड़े गवाहों या जांच को प्रभावित कर सकते हैं। सरकार ने यह भी दलील दी कि वे अन्य मामलों में भी आरोपी हैं।

शर्तों के साथ मिली राहत
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विनय चौबे को जमानत देने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है तो राज्य सरकार जमानत रद्द कराने के लिए सक्षम न्यायालय का रुख कर सकती है।
क्या है हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामला?
हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अगस्त 2015 में प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज की थी। करीब 10 वर्ष बाद इस मामले में नियमित एफआईआर दर्ज की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, नेक्सजेन के मालिक विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह पर वर्ष 2020-21 के दौरान कथित रूप से दबाव बनाकर वन भूमि का म्यूटेशन कराने का आरोप है। इसके अलावा जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि वर्ष 2010 से 2015 के बीच ब्रह्मास्त्रा एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के खाते में लगभग 3.16 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए थे। इस कंपनी में स्निग्धा सिंह निदेशक हैं। मामले की जांच अभी भी जारी है और आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय आना बाकी है।

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