झारखंड वन विभाग के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र का खेल, नौकरी के नाम पर युवाओं से ठगी का खुलासा

Rupa Kumari | July 27, 2026 | 02:19 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड वन विभाग के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर बेरोजगार युवाओं को ठगी का शिकार बनाने का मामला सामने आया है। विभाग के अनुसार, अब तक करीब आधा दर्जन युवकों को कथित रूप से नकली नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। जब ये युवक राज्य के विभिन्न जिलों में योगदान देने पहुंचे, तब जांच में उनके दस्तावेज फर्जी पाए गए। जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के एक युवक को भी वन विभाग में नौकरी का फर्जी नियुक्ति पत्र दिया गया था। युवक जब नियुक्ति के लिए संबंधित कार्यालय पहुंचा तो दस्तावेजों की जांच में वे नकली निकले। इसके बाद उसने अपने गृह राज्य में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस हाल ही में रांची स्थित वन विभाग मुख्यालय पहुंची और मामले की जांच की। युवक का आरोप है कि उसे रांची में प्रशिक्षण भी दिया गया था, जिसके बाद नियुक्ति पत्र सौंपा गया।

PCCF के फर्जी हस्ताक्षर और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) के कथित फर्जी हस्ताक्षर, नकली मुहर और विभागीय दस्तावेजों का दुरुपयोग कर नियुक्ति पत्र तैयार किए। अधिकारियों का कहना है कि इन दस्तावेजों का विभाग की आधिकारिक प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। वन विभाग के मुताबिक, 3 जुलाई को चतरा उत्तरी वन प्रमंडल कार्यालय को निबंधित डाक के माध्यम से विश्वजीत कुमार और जगदीश भारती नामक दो व्यक्तियों के कार्यग्रहण से संबंधित पत्र प्राप्त हुए थे। जब इन पत्रों और दस्तावेजों की जांच की गई, तो वे पूरी तरह फर्जी पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि जालसाजों ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया।

विभाग ने जारी किया अलर्ट

मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार के अधीन किसी भी पद पर नियुक्ति केवल अधिकृत आयोगों, चयन संस्थाओं और निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से ही की जाती है। विभाग ने युवाओं से अपील की है कि नौकरी से जुड़ी किसी भी सूचना या नियुक्ति पत्र की सत्यता आधिकारिक माध्यमों से अवश्य जांच लें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।

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बेरोजगार युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

अधिकारियों का मानना है कि जालसाज बेरोजगार युवाओं की नौकरी पाने की उम्मीद का फायदा उठाकर उन्हें ठगने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे मामलों में अभ्यर्थियों को किसी भी नियुक्ति पत्र, प्रशिक्षण कार्यक्रम या नौकरी के प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करनी चाहिए। फिलहाल मामले की जांच जारी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कौन लोग शामिल हैं और कितने युवाओं को इसका शिकार बनाया गया है।

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