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नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में किताब खरीद को लेकर विवाद, वित्त समिति की मंजूरी बिना 31 लाख रुपये भुगतान का आरोप

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Samachar Post रिपोर्टर, रांची : नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) से संबद्ध जनता शिवरात्री कॉलेज में किताबों की खरीद और भुगतान को लेकर नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि वित्त समिति की सहमति लिए बिना ही किताबों के सप्लायर को करीब 31 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार यह भुगतान जनता शिवरात्री कॉलेज के खाते से किया गया है। आरोप लगाया जा रहा है कि यह निर्णय आवश्यक वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर लिया गया। जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2017 से पहले कॉलेज को एक राशि उपलब्ध कराई गई थी, जिसका लंबे समय तक उपयोग नहीं किया गया। अब उसी राशि का उपयोग किताबों की खरीद के लिए किया गया है। आरोप है कि किताबों की खरीद और भुगतान से पहले वित्त समिति की औपचारिक स्वीकृति नहीं ली गई, जबकि ऐसे मामलों में वित्तीय अनुमोदन आवश्यक माना जाता है।

कुलपति की भूमिका पर उठ रहे सवाल

मामले में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश सिंह की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि खरीद प्रक्रिया में कुलपति की विशेष रुचि रही और उनके निर्देश पर ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। हालांकि, इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि जनता शिवरात्री कॉलेज द्वारा जनवरी 2026 में किताबों की खरीद के लिए टेंडर जारी किया गया था। आरोप है कि टेंडर प्रकाशन के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन नहीं किया गया। किताबों की आपूर्ति के बाद सप्लायर को भुगतान का मामला लंबे समय तक लंबित रहा। बाद में वित्त समिति की सहमति के बिना ही भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है।

राज्यपाल से की गई शिकायत

सूत्रों के अनुसार पूरे मामले की शिकायत राज्यपाल के समक्ष भी की गई है। शिकायत में खरीद प्रक्रिया, वित्तीय मंजूरी और भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत के बाद संबंधित विभाग और राजभवन स्तर पर इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं तथा आरोपों की सत्यता की जांच किस प्रकार की जाती है।

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जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें

किताब खरीद और भुगतान विवाद सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर चर्चा तेज हो गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और निर्णय लेने वाले पदाधिकारियों की भूमिका की जांच हो सकती है।

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Rupa Kumari

Reporter | Samachar Postमैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।See Profile

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