धनबाद में ई-रिक्शा चालकों की नई परेशानी, ब्लूटूथ आधारित बैटरियों से छेड़छाड़ की शिकायत

Rupa Kumari | July 4, 2026 | 12:11 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, धनबाद : कोयला नगरी धनबाद में ई-रिक्शा चालकों के सामने एक नई तकनीकी चुनौती सामने आई है। कई चालकों का दावा है कि चलते-चलते उनके ई-रिक्शे अचानक बीच सड़क पर बंद हो जा रहे हैं। शुरुआत में इसे सामान्य तकनीकी खराबी माना गया, लेकिन अब कुछ चालक इसे मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी से छेड़छाड़ का मामला बता रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ आधुनिक ई-रिक्शों में लगी लिथियम-आयन बैटरियां ब्लूटूथ आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से लैस होती हैं। इनकी निगरानी और सेटिंग्स के लिए विशेष मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाता है। आरोप है कि यदि बैटरी की सुरक्षा सेटिंग्स मजबूत न हों या पासवर्ड सुरक्षित न हो, तो कोई व्यक्ति ब्लूटूथ के माध्यम से बैटरी से कनेक्ट होकर उसकी पावर सप्लाई प्रभावित कर सकता है, जिससे वाहन अचानक बंद हो सकता है। स्थानीय ई-रिक्शा चालकों ने बताया कि चलते वाहन के अचानक रुक जाने से न केवल यात्रियों को परेशानी होती है, बल्कि दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं से रोज़गार और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या केवल उन ई-रिक्शों में संभावित रूप से देखी जा सकती है जिनमें ब्लूटूथ आधारित लिथियम-आयन बैटरियां लगी हैं और जिनकी सुरक्षा सेटिंग्स पर्याप्त मजबूत नहीं हैं। वहीं पारंपरिक लीड-एसिड बैटरी वाले ई-रिक्शों में इस तरह की आशंका नहीं होती। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि रिपोर्ट में वर्णित दावों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या निर्माता कंपनी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ई-रिक्शा चालक क्या सावधानी बरतें?

विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं। बैटरी के डिफॉल्ट ब्लूटूथ पासवर्ड को तुरंत बदलवाएं। अधिकृत सर्विस सेंटर से सुरक्षा सेटिंग्स की जांच कराएं। आवश्यकता न होने पर ब्लूटूथ सुविधा को निष्क्रिय करवा दें। अनधिकृत मोबाइल ऐप या थर्ड-पार्टी एक्सेस से बचें। बैटरी निर्माता की सुरक्षा संबंधी सलाह का पालन करें।

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जांच और पुष्टि का इंतजार

फिलहाल इस तरह की घटनाओं को लेकर कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या पुष्टि सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में तकनीकी परीक्षण और तथ्यात्मक जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वाहन बंद होने की वजह वास्तव में डिजिटल छेड़छाड़ है या कोई अन्य तकनीकी समस्या।

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