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बच्चों से जुड़े मामलों में और संवेदनशील होगी पुलिस, चाईबासा में विशेष कार्यशाला आयोजित

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Samachar Post रिपोर्टर,चाईबासा :चाईबासा में बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। पुलिस लाइन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘बाल-संवेदनशील पुलिसिंग: मामले का दस्तावेजीकरण और बाल-संवेदनशील प्रक्रियाएं’ विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) को मजबूत करना और बच्चों से जुड़े मामलों में कानूनी व मानवीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देना था।

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यूनिसेफ और NUSRL के सहयोग से हुआ आयोजन

कार्यक्रम का आयोजन चाईबासा पुलिस ने UNICEF के सहयोग से किया। वहीं सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (CCR), NUSRL ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। कार्यशाला में जिले के विभिन्न थानों से पहुंचे 39 बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों (CWPO) ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों को संभालने के व्यावहारिक तरीके समझाए गए।

एसपी ने दिए संवेदनशीलता और कानून पालन के निर्देश

कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) और पॉक्सो एक्ट (POCSO) के तहत दर्ज मामलों में सही दस्तावेजीकरण और संवेदनशील व्यवहार बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चों से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।

बाल अपराध और शोषण मामलों पर विशेष चर्चा

तकनीकी सत्र में यूनिसेफ से जुड़े बाल संरक्षण अधिकारी गौरव कुमार ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 और झारखंड किशोर न्याय नियम 2017 के तहत पुलिस की जिम्मेदारियों को विस्तार से समझाया। प्रशिक्षण में बाल भिक्षावृत्ति, मादक पदार्थों की तस्करी, लैंगिक शोषण और बाल विवाह जैसे मामलों की पहचान और संवेदनशील कार्रवाई पर विशेष चर्चा हुई।

केस स्टडी और रोल प्ले से दी गई ट्रेनिंग

कार्यशाला को केवल भाषण तक सीमित नहीं रखा गया। अधिकारियों को केस स्टडी, रोल प्ले और व्यावहारिक अभ्यास के जरिए प्रशिक्षण दिया गया। विधि से संघर्षरत बच्चों (CCL) और बाल संरक्षण मामलों के उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया कि ऐसी परिस्थितियों में पुलिस को किस तरह व्यवहार करना चाहिए।

बाल विवाह रोकने में पुलिस की भूमिका पर जोर

कार्यक्रम में PCI इंडिया के सलाहकार हिमांशु जेना ने बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करने में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्यशैली और अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनेगी।

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Meenu

Reporter  |  Samachar Post

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