रिम्स में वाहन बिल भुगतान घोटाले का खुलासा, बाइक नंबर पर पास हुए कार और बस के बिल

Rupa Kumari | June 17, 2026 | 11:05 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में वाहन बिल भुगतान से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। महालेखाकार (एजी) झारखंड की ऑडिट रिपोर्ट में लाखों रुपये के भुगतान में गंभीर गड़बड़ियों की ओर संकेत किया गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए रिम्स प्रबंधन ने एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया है और उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।महालेखाकार की रिपोर्ट के अनुसार, वाहन किराया और परिवहन से जुड़े कुछ बिलों के भुगतान में गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं। जांच के दौरान यह सामने आया कि जिन बिलों का भुगतान चारपहिया वाहनों और बसों के नाम पर किया गया, उनमें कई स्थानों पर मोटरसाइकिलों के पंजीकरण नंबर दर्ज थे। रिपोर्ट में लगभग 9.10 लाख रुपये के भुगतान पर सवाल उठाए गए हैं। इस खुलासे के बाद यह जांच का विषय बन गया है कि गलत वाहन विवरण के बावजूद भुगतान की स्वीकृति कैसे दी गई।

रिम्स में बुलाई गई आपात बैठक

मामले के सामने आने के बाद रिम्स निदेशक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशासनिक और चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में ऑडिट रिपोर्ट की आपत्तियों पर चर्चा की गई और संस्थान की वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के उपायों पर विचार किया गया। प्राथमिक जांच में जिम्मेदारी तय होने के बाद एक सहायक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता सामने आने पर उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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टूर एंड ट्रेवल्स की गाड़ियों पर भी उठे सवाल

ऑडिट रिपोर्ट के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि रिम्स में अधिकारियों के उपयोग के लिए संचालित कुछ टूर एंड ट्रेवल्स वाहनों में नियमों के अनुरूप पीले रंग की नंबर प्लेट नहीं लगी थी। नियमों के अनुसार व्यावसायिक उपयोग में आने वाले वाहनों पर पीले रंग की नंबर प्लेट अनिवार्य होती है। ऐसे में इस पहलू की भी अलग से जांच की जा रही है। रिम्स प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संस्थान ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने की बात दोहराते हुए कहा है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

रिपोर्ट के बाद हो सकती है बड़ी कार्रवाई

जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद कई अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल पूरे मामले ने रिम्स की वित्तीय निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिम्स प्रबंधन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला महज लापरवाही का है या सरकारी धन के दुरुपयोग की कोई बड़ी साजिश।

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