Samachar Post रिपोर्टर, जमशेदपुर: करोड़ों रुपये के बजट और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है। इलाज के दौरान एक 13 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद उसके पिता को शव ले जाने के लिए न स्ट्रेचर मिला और न ही मोक्ष वाहन की सुविधा। मजबूरी में पिता अपने बेटे का शव गोद में उठाकर अस्पताल से बाहर निकला। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं और संवेदनशीलता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इलाज के दौरान हुई बच्चे की मौत
जानकारी के अनुसार सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया स्थित सतबोहिनी गांव निवासी अखिलेश पासवान अपने 13 वर्षीय बेटे को गंभीर हालत में शनिवार देर रात एमजीएम अस्पताल लेकर पहुंचे थे। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चा शुगर की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। उसका ब्लड शुगर स्तर 400 तक पहुंच गया था, जबकि हीमोग्लोबिन मात्र 2.6 रह गया था। चिकित्सकों ने उसका इलाज शुरू किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद रविवार सुबह उसकी मौत हो गई।
मौत के बाद शुरू हुई परिजनों की परेशानी
परिजनों का आरोप है कि बच्चे की मौत के बाद शव को वार्ड से बाहर ले जाने के लिए उन्हें अस्पताल में काफी मशक्कत करनी पड़ी। उन्होंने स्ट्रेचर की मांग की, लेकिन काफी प्रयास के बावजूद कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। बताया गया कि परिवार के लोग अस्पताल के विभिन्न विभागों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें न तो स्ट्रेचर उपलब्ध कराया गया और न ही किसी कर्मचारी ने मदद की। आखिरकार पिता ने बेटे के शव को गोद में उठाया और अस्पताल परिसर से बाहर लेकर आए।
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मोक्ष वाहन भी नहीं मिला
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि शव को घर तक पहुंचाने के लिए अस्पताल की ओर से मोक्ष वाहन की सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद उन्हें निजी वाहन की व्यवस्था कर शव को घर ले जाना पड़ा। घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया है। मामले पर एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने कहा कि घटना की जानकारी मिली है। पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
फिर उठे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार बजट बढ़ाने और संसाधन उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं। इसके बावजूद एक पिता को अपने बेटे का शव गोद में उठाकर अस्पताल से बाहर ले जाना पड़ा, जिसने व्यवस्था की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।