Samachar Post रिपोर्टर,पलामू :भीषण गर्मी के बीच पलामू में बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहर से लेकर गांव तक घंटों बिजली कटौती हो रही है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो गया है। दिन में तेज धूप और रात में उमस भरी गर्मी के कारण लोग परेशान हैं और कई इलाकों में लोग रातभर ठीक से सो भी नहीं पा रहे। जिले को औसतन 132 मेगावाट बिजली की जरूरत है, लेकिन फिलहाल सिर्फ 97 मेगावाट बिजली की सप्लाई हो रही है। बिजली की कमी के कारण कई क्षेत्रों में लगातार कटौती की जा रही है।
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तीन डिवीजनों में बंटी है बिजली व्यवस्था
पलामू जिले में बिजली आपूर्ति के लिए डालटनगंज, छतरपुर और हुसैनाबाद डिवीजन बनाए गए हैं। बिजली विभाग के अनुसार: डालटनगंज डिवीजन को 85 मेगावाट बिजली की जरूरत है, लेकिन सिर्फ 65 मेगावाट सप्लाई हो रही है। छतरपुर डिवीजन में 32 मेगावाट की मांग के मुकाबले केवल 17 मेगावाट बिजली मिल रही है। हुसैनाबाद डिवीजन में भी जरूरत से कम बिजली आपूर्ति हो रही है और यहां सिर्फ 15 मेगावाट सप्लाई दी जा रही है। छतरपुर डिवीजन के अंतर्गत हरिहरगंज, पीपरा और नौडीहा बाजार जैसे इलाके आते हैं, जहां बिजली संकट सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है।
शहरों में 20 घंटे, गांवों में 12 घंटे बिजली
डालटनगंज शहर में करीब 20 घंटे बिजली मिलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति काफी खराब बनी हुई है। गांवों में सिर्फ 12 से 14 घंटे बिजली मिल रही है और वह भी अनियमित तरीके से। आंधी और तूफान के बाद कई गांवों में घंटों बिजली आपूर्ति ठप रहती है। विभागीय कर्मचारियों के मुताबिक शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक बिजली की मांग सबसे ज्यादा रहती है। ऐसे में कई बार ग्रामीण इलाकों की बिजली काटकर शहरी क्षेत्रों में सप्लाई दी जाती है। पहले पलामू दूसरे राज्यों से मिलने वाली बिजली पर निर्भर था, लेकिन अब जिला हटिया ग्रिड से जुड़ चुका है और लहलहे में नेशनल ग्रिड भी तैयार हो गया है। इसके बावजूद बिजली संकट खत्म नहीं हुआ है। लगातार बढ़ती गर्मी और बिजली की कमी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बिजली संकट का असर खेती-किसानी पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
खेती और कारोबार पर भी असर
किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए मोटर चलानी पड़ती है, लेकिन नियमित बिजली नहीं मिलने से पटवन का काम प्रभावित हो रहा है। इसका असर सब्जी उत्पादन पर भी पड़ने लगा है। वहीं शहर के बाजारों में होटल, रेस्टहाउस, एसी और कूलर के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है। ट्रांसफॉर्मरों पर दबाव बढ़ने के कारण बार-बार बिजली कटने की समस्या सामने आ रही है। व्यापारियों का कहना है कि बिजली कटौती की वजह से कारोबार प्रभावित हो रहा है और दुकानों में ग्राहकों की संख्या भी कम हो गई है।
बच्चे, बुजुर्ग और मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित
भीषण गर्मी और बिजली कटौती का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ रहा है। बिजली नहीं रहने से उमस बढ़ जाती है और लोगों को सांस लेने तक में परेशानी होती है। गर्मी और डिहाइड्रेशन की वजह से अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। जैन मंदिर रोड निवासी अमरनाथ सोनी ने कहा कि इस बार गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और ऊपर से बिजली संकट ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
गर्मी के कारण बिजली की खपत अचानक बढ़ गई- अधिकारी
बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार ने बताया कि गर्मी के कारण बिजली की खपत अचानक बढ़ गई है, जिससे लोड बढ़ रहा है और कटौती करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी परेशानी बनी हुई है। उन्होंने लोगों से ट्रांसफॉर्मर के पास कूड़ा नहीं जलाने की अपील भी की, क्योंकि इससे तार जलने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या बढ़ रही है।
Reporter | Samachar Post