Samachar Post रिपोर्टर, जामताड़ा :झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मंईयां सम्मान योजना’ में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड में नियमों को दरकिनार कर नाबालिग लड़कियों और पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के लोगों को भी योजना का लाभ दिए जाने का खुलासा हुआ है। मामले का खुलासा प्रभारी बीडीओ देवराज गुप्ता की जांच के दौरान हुआ। इसके बाद बिचौलियों और संबंधित कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
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शुरुआती जांच में नहीं मिला था एक भी अपात्र लाभुक
जानकारी के अनुसार नारायणपुर प्रखंड में इस योजना के तहत करीब 34 हजार लाभुक पंजीकृत हैं। सरकार के निर्देश पर सभी लाभुकों का फिजिकल वेरिफिकेशन कराया जा रहा था। शुरुआती चरण में पंचायत सचिवों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को घर-घर जाकर जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। हैरानी की बात यह रही कि शुरुआती 8,500 लाभुकों की जांच रिपोर्ट में एक भी महिला अपात्र नहीं पाई गई। इतनी बड़ी संख्या में सभी लाभुकों का पात्र होना प्रशासन को संदिग्ध लगा।
BDO की दोबारा जांच में खुला राज
संदेह बढ़ने पर प्रभारी बीडीओ देवराज गुप्ता ने खुद मामले की निगरानी शुरू की और दोबारा क्रॉस वेरिफिकेशन का आदेश दिया। जांच में सामने आया कि कई नाबालिग लड़कियों के नाम पर योजना की राशि निकाली जा रही थी। इसके अलावा कुछ लाभुक पश्चिम बंगाल के निवासी पाए गए, जो कानूनी रूप से इस योजना के पात्र ही नहीं थे।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए उठाया जा रहा था पैसा
सूत्रों के मुताबिक इस पूरे फर्जीवाड़े में नकली पहचान पत्र और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। कागजों में हेरफेर कर अपात्र लोगों के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए जा रहे थे। प्रभारी बीडीओ देवराज गुप्ता ने कहा है कि पहले से सत्यापित सभी मामलों की दोबारा गहन जांच की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी सरकारी कर्मी या अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
योजना की पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस खुलासे के बाद सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर होने वाले सत्यापन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को सहायता देना था, उसमें फर्जी दस्तावेजों के जरिए सेंधमारी ने पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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