Samachar Post रिपोर्टर, जामताड़ा : साइबर अपराध के लिए चर्चित जामताड़ा जिले में इसके खिलाफ एक अनोखी सामाजिक पहल शुरू हुई है। कर्माटांड़ थाना क्षेत्र की शिकारपोषणी पंचायत स्थित सुघी पहाड़ी गांव में आदिवासी समाज के लोगों ने अपने घरों के दरवाजों और दीवारों पर साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टरों पर लिखा है, “मैं एक सीधा-साधा आदिवासी समाज का नागरिक हूं। मैं खुद भी साइबर अपराधियों के खिलाफ हूं और दूसरों को भी सुरक्षित रहने की सलाह देता हूं।” ग्रामीणों का कहना है कि इस अभियान के जरिए समाज को साइबर ठगी से दूर रखने और लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
हर रविवार माझी थान में जुटते हैं ग्रामीण
साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता अभियान केवल पोस्टर तक सीमित नहीं है। गांव के लोग हर रविवार माझी थान में एकत्र होकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान साइबर अपराध से दूर रहने, समाज के अन्य लोगों को जागरूक करने और गलत गतिविधियों से बचने का संकल्प लिया जाता है। ग्रामीणों की इस पहल की जिले में चर्चा हो रही है। इसे साइबर अपराध के खिलाफ सामाजिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
जिले की आबादी में आदिवासी समाज की बड़ी हिस्सेदारी
वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, जामताड़ा जिले में आदिवासी समाज की आबादी 2,40,489 है, जो जिले की कुल आबादी का करीब 30.40 प्रतिशत है। राजनीतिक स्तर पर भी यह समुदाय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और चुनावों में इसका प्रभाव माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती दौर में आदिवासी समाज के चार लोगों के खिलाफ साइबर अपराध के मामले दर्ज हुए थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों के साइबर थाना रिकॉर्ड के हवाले से दावा किया गया है कि आदिवासी समाज का कोई व्यक्ति साइबर क्राइम में संलिप्त नहीं पाया गया है।

युवाओं में साइबर ठगी से दूर रहने का संदेश
रिपोर्टिंग के दौरान गांव में युवाओं और छात्रों के मोबाइल इस्तेमाल को लेकर भी सकारात्मक तस्वीर सामने आने की बात कही गई। बताया गया कि छात्र मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल मुख्य रूप से पढ़ाई, ऑनलाइन कोर्स और करियर से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए कर रहे हैं। वहीं, खाली समय में युवा संगीत सुनने के अलावा अपनी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी सामग्री भी इंटरनेट पर तलाशते हैं।
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सादगी के साथ जागरूकता का संदेश
गांव में एक ओर जहां साइबर ठगी के जरिए बनाई गई आलीशान इमारतों की चर्चा होती है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी परिवार अब भी साधारण घरों में रहते हुए अपनी पारंपरिक जीवनशैली को बनाए हुए हैं। घरों पर लगाए गए पोस्टरों और सामूहिक संकल्प के जरिए समाज ने साइबर अपराध के खिलाफ अपनी स्पष्ट सोच सामने रखने की कोशिश की है। ग्रामीणों की यह पहल लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ यह संदेश भी देती है कि साइबर अपराध से मुकाबले के लिए सामाजिक भागीदारी और जागरूकता भी महत्वपूर्ण है।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।


