Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब सुरक्षा बलों ने 1 करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर को उसके चार साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन दौरा पहाड़’ नाम दिया गया था। झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन और धनबाद-गिरिडीह पुलिस की संयुक्त टीम ने इस विशेष अभियान को अंजाम दिया। मिसिर बेसरा और उसके साथ गिरफ्तार किए गए चार अन्य इनामी नक्सलियों पर कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियां इसे झारखंड में लाल आतंक के खिलाफ सबसे बड़ी सफलताओं में से एक मान रही हैं।
खुफिया सूचना से शुरू हुई कार्रवाई
पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों को विश्वसनीय खुफिया सूचना मिली थी कि मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ एक टाटा मैजिक वाहन से धनबाद से गिरिडीह की ओर जा रहा है। सूचना मिलते ही धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार और गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने संयुक्त अभियान शुरू करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन की निगरानी सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह और आईजी अभियान नरेंद्र कुमार कर रहे थे। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पूरी रणनीति बेहद गोपनीय तरीके से तैयार की गई।
सीमा पर की गई घेराबंदी, बिना गोली चले हुई गिरफ्तारी
सुरक्षाबलों ने धनबाद और गिरिडीह की सीमा पर पहले से ही घेराबंदी कर रखी थी। जैसे ही संदिग्ध टाटा मैजिक वाहन निर्धारित स्थान पर पहुंचा, जवानों ने उसे चारों ओर से घेर लिया। पहचान की पुष्टि होने के बाद मिसिर बेसरा और उसके चारों साथियों को बिना किसी प्रतिरोध के गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, अभियान इतना सटीक और सुनियोजित था कि पूरी कार्रवाई के दौरान एक भी गोली चलाने की जरूरत नहीं पड़ी। इससे किसी भी प्रकार के नुकसान या मुठभेड़ की स्थिति से बचा जा सका।
वाहन से बरामद हुए आधुनिक हथियार
गिरफ्तारी के दौरान सुरक्षाबलों ने टाटा मैजिक वाहन की तलाशी ली, जिसमें से तीन एके-47 राइफल, कई मैगजीन और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि इन हथियारों का इस्तेमाल किसी बड़ी नक्सली वारदात को अंजाम देने के लिए किया जाना था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि समय रहते मिली सूचना और त्वरित कार्रवाई के कारण संभावित बड़ी घटना को टाला जा सका।

संगठन की कमर टूटने का दावा
सुरक्षाबलों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। वह लंबे समय से झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा है। संगठन के संचालन, हथियारों की आपूर्ति, प्रशिक्षण और हमलों की रणनीति तैयार करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान संगठन के शेष नेटवर्क, हथियारों के भंडार, आर्थिक स्रोतों और फंडिंग चैनलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। इससे नक्सल विरोधी अभियान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक उपलब्धि
करीब दो दशकों से अधिक समय तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने रहे मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक उपलब्धि माना जा रहा है। सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से न केवल संगठन की कमान कमजोर होगी, बल्कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करने के प्रयासों को भी बल मिलेगा।

Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

