BREAKING: माध्यमिक आचार्य भर्ती परीक्षा पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मुख्य सचिव को CID में FIR कराने का निर्देश

Meenu | August 29, 2026 | 01:19 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की माध्यमिक आचार्य प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया है। परीक्षा में कथित हैकिंग और 2,819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को इस मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ CID में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है।

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मुख्य सचिव को CID में FIR कराने का निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य के मुख्य सचिव इस पूरे मामले को लेकर CID में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराएं। अदालत के इस निर्देश के बाद अब परीक्षा में कथित गड़बड़ी और हैकिंग से जुड़े पहलुओं की जांच CID द्वारा किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

2,819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा से जुड़ा है मामला

यह मामला JSSC की ओर से आयोजित माध्यमिक आचार्य प्रतियोगिता परीक्षा में कथित तकनीकी गड़बड़ी/हैकिंग और उसके बाद 2,819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा कराने के निर्णय से जुड़ा है। पुनर्परीक्षा के फैसले को चुनौती देते हुए अभ्यर्थियों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान परीक्षा प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अदालत के समक्ष दलीलें रखी गईं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से इन अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन, अभिजीत इंद्र गुरु और अभिषेक कुमार ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। कोर्ट के आदेश के बाद अब इस मामले में जांच और FIR की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। CID जांच के दौरान यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि परीक्षा से संबंधित कथित गड़बड़ी के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं और घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।

कोर्ट के आदेश के बाद आगे क्या?

हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार मुख्य सचिव के स्तर से CID में FIR दर्ज कराए जाने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ेगी। जांच में परीक्षा की प्रक्रिया, कथित हैकिंग और इससे जुड़े अन्य तकनीकी एवं आपराधिक पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है।

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