JPSC-JSSC सुधारों पर सुस्ती, 12 दिन बाद भी नहीं बनी रिफॉर्म्स कमेटी और निगरानी प्रकोष्ठ

Rupa Kumari | August 29, 2026 | 02:29 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सरकार ने 18 अगस्त को महत्वपूर्ण फैसले लिए थे। JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और धांधली की शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ (इंटरनल मॉनिटरिंग सेल) और परीक्षा सुधार समिति (रिफॉर्म्स कमेटी) गठित करने की घोषणा की थी। हालांकि, फैसले के 12 दिन बीत जाने के बाद भी दोनों समितियों का गठन नहीं हो पाया है। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के सचिव प्रवीण टोप्पो ने 18 अगस्त को जारी अधिसूचना में कहा था कि भर्ती परीक्षाओं में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे। इसके तहत परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी के लिए आंतरिक प्रकोष्ठ बनाने और व्यापक सुधारों के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय लिया गया था।

दो महीने में रिपोर्ट सौंपने का था लक्ष्य

सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार समिति गठित करने का फैसला लिया था। समिति को परीक्षा प्रणाली की समीक्षा कर दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी थी। इसके अलावा भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग को लेकर भी पहल करने की बात कही गई थी।

अब तक नहीं बन सकी समितियां

घोषणा के बावजूद अब तक न तो रिफॉर्म्स कमेटी का गठन हो पाया है और न ही JPSC-JSSC के लिए आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ अस्तित्व में आ सका है। ऐसे में परीक्षा सुधारों को लेकर सरकार की मंशा और तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि समिति को गठन के बाद केवल दो महीने के भीतर रिपोर्ट देनी है, लेकिन गठन में ही देरी हो रही है।

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शीर्ष स्तर पर सहमति बनने में देरी

सूत्रों के अनुसार, समितियों के गठन को लेकर सरकार के उच्च स्तर पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। बताया जा रहा है कि अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली समिति में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों या निदेशकों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। इसी वजह से अंतिम स्वरूप तय होने में समय लग रहा है। वहीं, परीक्षा मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन को लेकर हाईकोर्ट से अनुरोध किए जाने की प्रक्रिया और उसकी स्थिति भी अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। ऐसे में भर्ती परीक्षा सुधारों को लेकर सरकार के घोषित कदम फिलहाल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं।

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