JPSC : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 2 साल से अटका सिविल जज परीक्षा परिणाम, अभ्यर्थियों में बढ़ा आक्रोश

Rupa Kumari | May 29, 2026 | 04:38 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा का संशोधित प्रारंभिक परीक्षा परिणाम अब तक जारी नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद करीब 15 सप्ताह बीत जाने के बाद भी न तो संशोधित पीटी रिजल्ट प्रकाशित हुआ है और न ही मुख्य परीक्षा आयोजित हो पाई है। लगातार हो रही देरी से अभ्यर्थियों में नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है। छात्रों का कहना है कि वे वर्षों से परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन परिणाम लंबित रहने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है।

उम्र सीमा खत्म होने की चिंता

अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा में लगातार देरी के कारण कई उम्मीदवारों की उम्र सीमा समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गई है। छात्र लंबे समय से JPSC, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का चक्कर लगाते-लगाते परेशान हो चुके हैं। अब छात्रों में आक्रोश भी बढ़ने लगा है, क्योंकि परीक्षा प्रक्रिया पिछले दो वर्षों से अधूरी पड़ी है।

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138 पदों के लिए निकला था विज्ञापन

दरअसल, JPSC ने 14 अगस्त 2023 को विज्ञापन संख्या 22/2023 जारी कर झारखंड सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 138 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत 10 मार्च 2024 को प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई थी। पीटी परीक्षा का परिणाम 2 जुलाई 2024 को प्रकाशित भी कर दिया गया था। साथ ही सफल अभ्यर्थियों से मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन भी मांगे गए थे।

विवादित प्रश्नों को लेकर पहुंचा मामला कोर्ट

पीटी परीक्षा के परिणाम के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने कटऑफ और प्रश्नों की त्रुटियों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि परीक्षा के तीन प्रश्न गलत थे और उनके अंक जोड़े जाने चाहिए। हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए संशोधित परिणाम जारी करने का निर्देश दिया था। हालांकि JPSC ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट ने भी दिया था निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी 2026 को अपने आदेश में हाईकोर्ट को विशेषज्ञ समिति गठित कर विवादित प्रश्नों की समीक्षा कराने और दो सप्ताह के भीतर संशोधित परिणाम प्रकाशित कराने का निर्देश दिया था। लेकिन आदेश के महीनों बाद भी परीक्षा परिणाम जारी नहीं हो सका है। इसके कारण मुख्य परीक्षा भी आयोजित नहीं हो पा रही है। पिछले तीन वर्षों से परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार अनिश्चितता के कारण मानसिक दबाव बढ़ रहा है। छात्रों ने जल्द से जल्द संशोधित परिणाम जारी कर मुख्य परीक्षा कराने की मांग की है।

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