Samachar Post रिपोर्टर, रांची : जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की मांग को लेकर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मंच ने 9 अक्टूबर 2026 को मौन ‘भाषा यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है। मंच के अनुसार यात्रा मोरहाबादी से मेन रोड तक निकाली जाएगी। इसे लेकर मंच ने प्रेस वार्ता कर अपनी मांगों और आंदोलन की आगे की रणनीति की जानकारी दी।
29 सितंबर की प्रस्तावित यात्रा हुई थी स्थगित
मंच ने बताया कि पहले यह मौन भाषा यात्रा 29 सितंबर को प्रस्तावित थी। हालांकि राज्य में बने शोकाकुल माहौल को देखते हुए कार्यक्रम स्थगित कर इसे अब 9 अक्टूबर के लिए तय किया गया है। मंच के अनुसार झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़ी मांगों को लेकर पिछले दो महीनों से अभियान चलाया जा रहा है। 4 जुलाई को रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में आयोजित भाषा कॉन्क्लेव में 5 हजार से अधिक भाषाकर्मी, शिक्षक, शोधार्थी, बुद्धिजीवी और छात्र शामिल हुए थे। इसके बाद 22 जुलाई को जनजातीय एवं क्षेत्रीय शोध संस्थान में ‘भाषा संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें आंदोलन को आगे बढ़ाने और मौन यात्रा निकालने का निर्णय लिया गया।
38 वर्षों से प्रमोशन नहीं मिलने का दावा
मंच ने दावा किया कि वर्ष 1986 में विभाग की शुरुआत के समय से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं का अध्यापन कर रहे शिक्षकों को अब तक एक भी प्रमोशन नहीं मिला है। संगठन के अनुसार इन शिक्षकों ने JPSC और UPSC के प्रश्नपत्र तैयार करने के अलावा सैकड़ों विद्यार्थियों के पीएचडी शोध में भी योगदान दिया है। मंच का कहना है कि प्रथम बैच के कई शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं या उनका निधन हो गया है और वर्तमान में करीब 10 से 12 शिक्षक ही बचे हैं। संगठन ने ऐसे शिक्षकों के प्रमोशन का मामला जल्द सुलझाने की मांग की है।
नौ भाषाओं के विद्यार्थियों के लिए रोजगार की मांग
मंच ने झारखंड की नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की। संगठन के अनुसार इन विषयों से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए झारखंड के बाहर भी रोजगार के अवसर सीमित हैं। इसलिए राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के साथ कॉलेजों में इन भाषाओं के लिए नियमित पद सृजित किए जाने चाहिए। मंच ने आरोप लगाया कि अलग झारखंड राज्य बनने के बावजूद राज्य की अपनी भाषाओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है। संगठन ने सरकार से शिक्षकों की पदोन्नति और रोजगार से जुड़ी मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की है। मंच ने चेतावनी दी कि मांगों पर उचित पहल नहीं हुई तो छात्र और भाषा प्रेमी आगे भी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।





















