सरकारी नौकरी मिलने के बाद पत्नी को नहीं माना, हाईकोर्ट ने शिक्षक की अपील खारिज कर वैवाहिक संबंध बहाल करने का दिया आदेश

Rupa Kumari | July 13, 2026 | 10:44 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने लगभग 20 वर्ष पुराने वैवाहिक विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक शिक्षक की अपील खारिज कर दी है। शिक्षक ने अदालत में दावा किया था कि संबंधित महिला उसकी पत्नी नहीं है और सरकारी नौकरी मिलने के बाद उसे फंसाने के उद्देश्य से गांव के लोगों ने साजिश रची। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर इस दावे को खारिज कर दिया तथा शिक्षक को पत्नी के साथ वैवाहिक संबंध बहाल करने का निर्देश दिया।

पत्नी ने लगाया प्रताड़ना और घर से निकालने का आरोप

महिला ने अदालत को बताया कि दोनों का विवाह करीब दो दशक पहले हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। विवाह के बाद वह अपने ससुराल में रहने लगी थी। उसके अनुसार, शुरुआती दिनों में वैवाहिक जीवन सामान्य रहा, लेकिन बाद में पति के अपनी भाभी से कथित संबंध बन गए। इस मुद्दे को लेकर गांव स्तर पर कई बार पंचायत भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। महिला का आरोप था कि उसे लगातार प्रताड़ित किया गया और वर्ष 2015 में घर से निकाल दिया गया। इसके बाद उसने तलाक की मांग करने के बजाय वैवाहिक जीवन को बचाने के उद्देश्य से पारिवारिक न्यायालय में वैवाहिक संबंध बहाल करने की याचिका दायर की। मामले में शिक्षक की ओर से अदालत में कहा गया कि महिला उसकी पत्नी नहीं है। उसने दावा किया कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद उसे ब्लैकमेल करने और लाभ लेने की नीयत से यह विवाद खड़ा किया गया। शिक्षक ने विवाह और वैवाहिक संबंध दोनों से इनकार किया।

दस्तावेज और गवाहों ने बदली मामले की दिशा

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि कई वर्षों की मतदाता सूची, आधार कार्ड और वोटर आईडी समेत विभिन्न सरकारी दस्तावेजों में महिला के पति के रूप में शिक्षक का नाम दर्ज है। इसके अलावा कई प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने भी अदालत के समक्ष बयान दिया कि दोनों लंबे समय तक पति-पत्नी के रूप में साथ रह चुके हैं। अदालत ने कहा कि शिक्षक इन दस्तावेजों और गवाहों के बयानों को गलत साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।

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हाईकोर्ट ने बरकरार रखा निचली अदालत का फैसला

सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि शिक्षक ने बिना उचित कारण अपनी पत्नी का साथ छोड़ा। अदालत ने पारिवारिक न्यायालय के पहले के आदेश को सही ठहराते हुए शिक्षक की अपील खारिज कर दी और वैवाहिक संबंध बहाल करने का निर्देश दिया। अदालत का यह फैसला वैवाहिक विवादों में दस्तावेजी प्रमाणों और प्रत्यक्ष गवाहों की अहम भूमिका को भी रेखांकित करता है।

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