Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने डोरंडा थाना पुलिस पर एक नाबालिग को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखने और उसकी उम्र को लेकर विवाद के मामले में कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट के आदेश के बावजूद थाने से सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं किए जाने पर अदालत ने पुलिस प्रशासन से गंभीर सवाल पूछे हैं। मामले में अब राज्य के गृह सचिव और डीजीपी को 12 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
CCTV फुटेज पेश नहीं होने पर कोर्ट नाराज
सुनवाई के दौरान डोरंडा थाना प्रभारी अदालत के निर्देश के बावजूद घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं कर सके। थाना प्रभारी की ओर से बताया गया कि संबंधित सीसीटीवी कैमरा खराब था। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि रांची शहर की सड़कों, प्रमुख चौराहों और थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों का सुचारू रूप से काम करना जरूरी है। अदालत ने इस मामले में पुलिस व्यवस्था और निगरानी तंत्र को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए।
क्या है नाबालिग की हिरासत का मामला
याचिकाकर्ता फिरोज अंसारी व अन्य की ओर से दायर हेबियस कॉरपस याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने 4 सितंबर को उनके बच्चे को कथित तौर पर हिरासत में लिया था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने पुलिस को जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध कराते हुए बच्चे की उम्र 18 वर्ष से कम होने की जानकारी दी थी। याचिका के मुताबिक, इसके बावजूद पुलिस रिकॉर्ड में उसकी उम्र 19 वर्ष दर्शाई गई और 8 सितंबर को उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
रिमांड को चुनौती देने की दी छूट
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रार्थी को पुलिस द्वारा बच्चे को न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने के फैसले को अलग याचिका के जरिए चुनौती देने की छूट दी है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं किए जाने के मामले को कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। इसी के मद्देनजर गृह सचिव और डीजीपी को 12 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।




















