Samachar Post रिपोर्टर, जमशेदपुर : झारखंड के चर्चित सहारा सिटी नाबालिग दुष्कर्म मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने साक्ष्य के अभाव में 21 आरोपियों को बरी कर दिया है। बरी किए गए लोगों में पटमदा के तत्कालीन डीएसपी अजय केरकेट्टा, एमजीएम थाना के पूर्व प्रभारी इमदाद अंसारी और पूर्व मंत्री के भाई गुड्डू गुप्ता समेत अन्य आरोपी शामिल हैं। अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर सका, जिसके बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।
पीड़िता ने आरोपियों को पहचानने से किया था इनकार
मामले की सुनवाई के दौरान 14 जुलाई 2026 को पीड़िता और उसकी मां की गवाही दर्ज की गई थी। खबर के मुताबिक, पीड़िता ने गवाही के दौरान पहले आरोपित किए गए 22 लोगों में से किसी की भी पहचान करने से इनकार कर दिया था। इससे अभियोजन पक्ष के मामले को झटका लगा। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बाद में शिव कुमार महतो और इंद्रपाल सैनी को अदालत से राहत मिल गई थी। शेष आरोपियों के खिलाफ सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने 21 लोगों को बरी करने का आदेश दिया।

पूर्व डीएसपी और थाना प्रभारी की ओर से अधिवक्ताओं ने की पैरवी
तत्कालीन डीएसपी अजय केरकेट्टा और पूर्व थाना प्रभारी इमदाद अंसारी की ओर से अधिवक्ता प्रकाश झा ने अदालत में पक्ष रखा। वहीं, अन्य आरोपियों की ओर से अधिवक्ता गौरव पाठक, प्रमोद सिंह बुंदेला और संजय मुखर्जी ने पैरवी की। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्य आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए। इसी आधार पर 21 आरोपियों को बरी किया गया।
2019 में दर्ज हुई थी प्राथमिकी
पीड़िता की मां के बयान पर 18 जनवरी 2019 को मानगो थाने में पॉक्सो अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। खबर के अनुसार, अदालत के आदेश पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत तत्कालीन डीएसपी, थाना प्रभारी समेत अन्य लोगों को भी मामले में आरोपी बनाया गया था। इस मामले में दो अन्य आरोपियों को 25-25 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। खबर के मुताबिक, दोनों वर्तमान में घाघीडीह केंद्रीय कारागार में सजा काट रहे हैं।
बरी किए गए आरोपियों में कई चर्चित नाम
बरी किए गए आरोपियों में गुड्डू गुप्ता, अजय केरकेट्टा, इमदाद अंसारी के अलावा सोनू नैयर, लड्डन उर्फ पाहुल, मेनयर, दिनेश अग्रवाल, अमित सिंह, मुन्ना धोबी, अजित उर्फ बुलेट मिस्त्री, उपेंद्र सिंह, शाहिद, अभिषेक मिश्रा, लंगड़ा मकसूद, मनोज सहाय, गुरप्रीत सिंह, शंभू द्विवेदी और करीम समेत अन्य नाम शामिल हैं। अदालत के फैसले का अर्थ है कि इन 21 आरोपियों के खिलाफ इस मामले में आरोप साबित नहीं हो सके।





















