स्वर्णरेखा किनारे फिर मिला जिंदा बम, बहरागोड़ा में दहशत

Meenu | April 16, 2026 | 10:11 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर,जमशेदपुर :स्वर्णरेखा नदी के किनारे एक बार फिर द्वितीय विश्व युद्ध के समय का जिंदा बम मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया है। बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के पानीपोड़ा–नागुड़साईं इलाके में बुधवार देर रात यह विस्फोटक बरामद हुआ। पिछले एक महीने में यह तीसरी घटना है, जिससे ग्रामीणों में डर और असुरक्षा का माहौल गहरा गया है। भीषण गर्मी के कारण नदी का पानी काफी नीचे चला गया है। इसी वजह से जमीन में दबे पुराने विस्फोटक अब बाहर दिखने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द जांच नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।

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मछली पकड़ने गए लोगों ने देखा संदिग्ध वस्तु

बुधवार रात कुछ ग्रामीण मछली पकड़ने के लिए नदी किनारे पहुंचे थे। तभी उनकी नजर रेत में पड़े भारी लोहे के गोले पर पड़ी। पास जाकर देखने पर वह बम निकला। घबराए ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना गांव के मुखिया और पुलिस को दी।

पुलिस ने बनाया सुरक्षा घेरा

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके को खाली कराते हुए बम के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बम पुराना जरूर है, लेकिन उसमें विस्फोट की क्षमता अब भी हो सकती है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है।

पहले भी मिल चुके हैं युद्धकालीन बम

ग्रामीणों के अनुसार, 17 मार्च को भी इसी इलाके में एक बम मिला था, जिसे जांच में अमेरिकी निर्मित बताया गया था। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी विस्फोटक मिल चुके हैं, जिससे आशंका है कि जमीन के नीचे और भी बम दबे हो सकते हैं। पिछली बार बम को निष्क्रिय करने में सेना की टीम को करीब आठ दिन लगे थे। अब एक बार फिर प्रशासन ने सेना की बम निरोधक टीम को बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस मौके पर तैनात है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

ग्रामीणों की मांग, पूरे इलाके की हो जांच

लगातार बम मिलने से ग्रामीणों में आक्रोश और भय दोनों है। लोग चाहते हैं कि पूरे नदी तट की आधुनिक तकनीक से जांच कराई जाए, ताकि जमीन के नीचे छिपे विस्फोटकों का पता लगाया जा सके और भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। स्थानीय जानकारों का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह इलाका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था। संभव है कि उसी समय के बम यहां दब गए हों, जो अब जलस्तर घटने के कारण बाहर आ रहे हैं।

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