आदिवासी समुदाय सम्मान और मान्यता के लिए संघर्षरत: हेमंत सोरेन

Samachar Post रिपोर्टर, रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आदिवासी समुदाय के अधिकार और पहचान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हूल और बिरसा उलगुलान की आवाज बुलंद करने वाला आदिवासी समाज आज भी मान्यता और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहा है। असम विधानसभा चुनाव से पहले उनके इस बयान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। सीएम सोरेन ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाले और जल-जंगल-जमीन की रक्षा करने वाले आदिवासी आज अपने ही देश में पहचान के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि संथाल हूल और भगवान बिरसा के उलगुलान जैसी निर्णायक लड़ाइयां लड़ने वाले समुदाय आज भी संवैधानिक मान्यता के लिए संघर्षरत क्यों हैं।

असम के आदिवासियों को ST दर्जा नहीं मिलने पर उठाया सवाल

सीएम ने कहा कि असम के चाय बागानों में पीढ़ियों से रह रहे आदिवासी समाज को अब तक अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं मिला है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर का अन्याय बताया। सोरेन ने कहा कि जिन लोगों को अंग्रेज उनके घरों से दूर ले गए और जिन्होंने अपने श्रम से असम की अर्थव्यवस्था खड़ी की, उन्हें आज तक पहचान नहीं दी गई।

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राजनीति से ऊपर है पहचान का मुद्दा

हेमंत सोरेन ने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि न्याय, सम्मान और पहचान का सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रही सरकारों ने भी इस मुद्दे को प्राथमिकता नहीं दी और घोषणापत्र में भी जगह नहीं मिली।

वोट की अपील भी की

सीएम सोरेन ने लोगों से आदिवासी पहचान, न्यूनतम मजदूरी, शिक्षा, आवास और रोजगार के मुद्दों पर समर्थन देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिना डरे और बिना बंटे तीर-धनुष निशान को समर्थन दें और जेएमएम-जेबीपी उम्मीदवारों को विजयी बनाएं।

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