विधानसभा के बाहर विधायक निर्मल महतो का प्रदर्शन, JPSC की CBI जांच और JSSC-CGL रद्द करने की मांग

Rupa Kumari | August 6, 2026 | 10:47 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन मांडू विधायक निर्मल महतो ने JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने 14वीं JPSC परीक्षा की CBI जांच कराने और JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग उठाई।

प्रतीकात्मक ‘रेट लिस्ट’ के साथ किया विरोध

प्रदर्शन के दौरान विधायक निर्मल महतो अपने साथ एक प्रतीकात्मक “सरकारी नौकरी बिक्री केंद्र” की रेट लिस्ट लेकर पहुंचे। इस सूची में विभिन्न सरकारी पदों के कथित रेट दर्शाए गए थे। इसके माध्यम से उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। विधायक ने आरोप लगाया कि राज्य में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

निर्मल महतो ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं और अभ्यर्थियों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और सरकार को इन आरोपों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।

छात्र आंदोलन का किया समर्थन

विधायक ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छात्र कई दिनों से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से छात्रों की चिंताओं का समाधान निकालने और पूरे मामले में पारदर्शी कार्रवाई करने की मांग की।

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मानसून सत्र में गरमाएगा भर्ती परीक्षा का मुद्दा

गौरतलब है कि झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू हो गया है। JPSC, JSSC, छात्र आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे सत्र के दौरान प्रमुख राजनीतिक विषय बने रहने की संभावना है। विपक्ष इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपनी ओर से जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया का पक्ष सदन में रख सकती है। ऐसे में आगामी दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

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