झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय ने दक्षिण कोरिया के क्यूंगसंग विश्वविद्यालय के साथ एमओयू किया, अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में बड़ा कदम

Rupa Kumari | December 11, 2025 | 11:18 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय ने दक्षिण कोरिया के बुसान स्थित क्यूंगसंग विश्वविद्यालय के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शिक्षा, शोध, नवाचार और शैक्षणिक आदान–प्रदान को नई दिशा देगा। कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास ने प्रो. अरुण कुमार पाधी और डॉ. शशि मिश्रा की उपस्थिति में इस एमओयू को आधिकारिक रूप से जारी किया। कुलपति ने इसे विश्वविद्यालय के लिए “अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम” बताया और कहा कि यह साझेदारी छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी।

एमओयू के तहत होंगे कई संयुक्त कार्यक्रम

सीयूजे के डीन (शोध एवं विकास) प्रो. अरुण कुमार पाढ़ी के अनुसार, समझौते के तहत निम्न गतिविधियों पर विशेष रूप से काम किया जाएगा संयुक्त सेमिनार, व्याख्यान, कार्यशाला और संगोष्ठियों का आयोजन, छात्रों और शिक्षकों के लिए संयुक्त शोध प्लेटफॉर्म का निर्माण, आमंत्रण के आधार पर अल्पकालिक शोध यात्राएँ, दोनों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम, शिक्षक–विद्यार्थी आदान–प्रदान और अन्य शोध सहयोग, जिन पर दोनों पक्ष सहमत होंगे।

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क्यूंगसंग विश्वविद्यालय ने साझेदारी को बताया महत्वपूर्ण कदम

क्यूंगसंग विश्वविद्यालय के वाइस प्रेसिडेंट प्रो. जून ह्यूब पार्क ने इस एमओयू को लेकर खुशी जताई और कहा कि भारत के आदिवासी बहुल राज्य में शोध और शिक्षा के क्षेत्र में काम करना एक अवसर और अनुभव दोनों होगा। अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग की डॉ. कुमकुम जायसवाल ने इसे दोनों संस्थानों के लिए “सकारात्मक और आगे बढ़ने वाली पहल” बताया।

सीयूजे के अंतरराष्ट्रीय विस्तार में बड़ा कदम

एमओयू की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाने वाले सीयूजे के अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ प्रमुख डॉ. शशि मिश्रा ने बताया कि कोरिया में यह क्यूंगसंग चौथा विश्वविद्यालय है जिसके साथ सीयूजे ने समझौता किया है। दो और कोरियाई विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से विश्वविद्यालय में वैश्विक शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय शोध और अंतर-सांस्कृतिक सहयोग के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

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