5 दिवसीय दौरे पर रांची पहुंचे के. राजू, संगठन और SIR अभियान पर रहेगा फोकस

Meenu | July 2, 2026 | 01:52 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची :कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू पांच दिनों के दौरे पर रांची पहुंच गए हैं। उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य पार्टी संगठन को मजबूत करना, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान की समीक्षा करना है। पार्टी नेतृत्व इसे आगामी चुनावों की तैयारियों के लिहाज से अहम मान रहा है।

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SIR अभियान की करेंगे समीक्षा

दौरे के दौरान के. राजू राजधानी रांची के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों का भी दौरा करेंगे। वे बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और नेताओं के साथ बैठक कर SIR अभियान की प्रगति की समीक्षा करेंगे। कांग्रेस का दावा है कि राज्यभर में लगभग 23 हजार बूथ लेवल एजेंट (BLA) तैनात किए गए हैं। इनकी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि पात्र मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से न हटे और उन्हें आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कराने में मदद मिले।

संगठन को मजबूत करने पर रहेगा जोर

राज्यसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस संगठन के मनोबल को मजबूत करना भी इस दौरे का अहम उद्देश्य माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने और आगामी चुनावों की रणनीति को लेकर चर्चा करेगा। सूत्रों के अनुसार, के. राजू विभिन्न जिलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधे फीडबैक लेकर संगठन की जमीनी स्थिति का भी आकलन करेंगे।

राज्यसभा चुनाव में हार पर हो सकती है चर्चा

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि के. राजू अपने दौरे के दौरान हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार की समीक्षा कर सकते हैं। सत्ता गठबंधन की प्रमुख सहयोगी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद संगठन के भीतर कई सवाल उठे थे। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर वरिष्ठ नेताओं के साथ मंथन कर आगे की रणनीति तय कर सकता है।

सहयोगी दलों पर लगाए थे आरोप

राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद के. राजू ने हार के लिए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और वाम दलों पर क्रॉस वोटिंग और वोट अमान्य कराने का आरोप लगाया था। हालांकि उन्होंने इस मामले में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को जिम्मेदार नहीं ठहराया था। उनके बयान के बाद गठबंधन सहयोगियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी देखने को मिला था। ऐसे में उनका यह दौरा न केवल संगठनात्मक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्यों अहम है यह दौरा?

SIR अभियान की जमीनी समीक्षा। बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति। राज्यसभा चुनाव में हार के बाद संगठनात्मक स्थिति का आकलन। आगामी चुनावों को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं से फीडबैक।

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