चतरा में करोड़ों की जमीन हेराफेरी का मामला, हाईकोर्ट के आदेश पर CO समेत 10 लोगों पर FIR

Rupa Kumari | July 15, 2026 | 12:53 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, चतरा : झारखंड के चतरा जिले में करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और फर्जी म्यूटेशन के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर चतरा सदर थाना में अंचल अधिकारी (CO), अंचल निरीक्षक (CI), राजस्व कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर समेत 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला नगवां मोहल्ला स्थित 26 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। शिकायतकर्ता फियाज अहमद का आरोप है कि सरकारी अभिलेखों में यह जमीन मोहम्मद कलीमुल्लाह के नाम दर्ज थी और उन्होंने इसे विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत खरीदा था। उनका दावा है कि वे लंबे समय से उक्त भूमि पर कब्जे में हैं। शिकायत के अनुसार, जमीन के स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों में कथित रूप से छेड़छाड़ कर रिकॉर्ड बदले गए और अवैध तरीके से दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया पूरी की गई।

फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से जमीन बेचने का आरोप

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य कथित जाली दस्तावेज तैयार कर जमीन का सौदा दूसरे व्यक्तियों के नाम कर दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि अंचल कार्यालय के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड में बदलाव किया गया, जिससे कथित रूप से फर्जी म्यूटेशन संभव हो सका।

हाईकोर्ट की दखल के बाद दर्ज हुआ मामला

फियाज अहमद ने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर शिकायत करने के बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत के निर्देश के बाद चतरा सदर थाना में कांड संख्या 234/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। मामले में तत्कालीन अंचल अधिकारी अनिल कुमार, अंचल निरीक्षक विरेंद्र कुमार, राजस्व कर्मचारी सीमा कुमारी सिंह, कंप्यूटर ऑपरेटर संदीप कुमार समेत कुल 10 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। अन्य आरोपियों में हीरा कुमार, मनोज कुमार, मुकेश कुमार, उदय कुमार, साबरा खातून और सलमा खातून शामिल हैं।

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जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। भूमि अभिलेखों, म्यूटेशन प्रक्रिया और दस्तावेजों की वैधता की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला चतरा जिले में भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन और राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर रहा है।

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