SAIL और BHEL को केंद्र की चेतावनी, महारत्न दर्जे पर संकट के बादल

Rupa Kumari | June 6, 2026 | 11:27 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, बोकारो : केंद्र सरकार की दो प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों SAIL और BHEL को वित्तीय प्रदर्शन में सुधार करने के लिए सख्त चेतावनी दी गई है। सरकार ने दोनों कंपनियों को एक वर्ष का समय दिया है। निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरने की स्थिति में उनका महारत्न दर्जा वापस लिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय और लोक उद्यम विभाग (डीपीई) ने दोनों कंपनियों को चेतावनी नोटिस जारी किया है। इस दौरान कंपनियों के प्रदर्शन पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।

महारत्न दर्जा बनाए रखने के लिए जरूरी हैं ये मानक

सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को महारत्न दर्जा बनाए रखने के लिए लगातार तीन वर्षों में औसतन कम से कम 5,000 करोड़ रुपये का वार्षिक शुद्ध लाभ अर्जित करना होता है। बताया जा रहा है कि SAIL इस वित्तीय मानक को पूरा नहीं कर सकी है, जिसके कारण उस पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

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BHEL को भी सुधार के निर्देश

भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन संचालित BHEL को भी कमजोर वित्तीय प्रदर्शन के चलते नोटिस मिला है। कंपनी को परिचालन दक्षता बढ़ाने, लागत कम करने और लाभप्रदता में सुधार के लिए ठोस रणनीति तैयार करने को कहा गया है। महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को दिया जाने वाला सर्वोच्च दर्जा है। इसके तहत कंपनियों को निवेश, विस्तार और व्यावसायिक निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता मिलती है। कई मामलों में कंपनियां सरकार की पूर्व अनुमति के बिना भी बड़े कारोबारी फैसले ले सकती हैं।

कब मिला था महारत्न का दर्जा?

SAIL को वर्ष 2010 में नवरत्न से पदोन्नत कर महारत्न का दर्जा दिया गया था। BHEL को वर्ष 2013 में महारत्न का दर्जा प्राप्त हुआ था। दोनों कंपनियां लंबे समय से देश के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती रही हैं। सरकार ने दोनों कंपनियों को अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने का अवसर दिया है। एक वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद उनके प्रदर्शन की दोबारा समीक्षा की जाएगी। यदि अपेक्षित सुधार नहीं दिखता है, तो दोनों कंपनियों को महारत्न से नवरत्न श्रेणी में लाया जा सकता है। इससे उनकी स्वायत्तता और कारोबारी अधिकारों पर भी असर पड़ सकता है।

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