Samachar Post रिपोर्टर,रांची : भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही ने झारखंड सरकार के मंत्री राधाकृष्ण किशोर को खुला पत्र लिखकर राज्य की नौकरशाही के कामकाज और मंत्री की कथित बेबसी पर सवाल उठाए हैं। 19 जुलाई 2026 को लिखे गए इस पत्र में शाही ने दावा किया है कि सरकार में वरिष्ठ मंत्री होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। साथ ही उन्होंने मंत्री को इस्तीफा देने की सलाह भी दी है।
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‘राजनीतिक तंज नहीं, चिंता के कारण लिखा पत्र’
भानु प्रताप शाही ने पत्र में लिखा कि यह पत्र उन्होंने किसी राजनीतिक प्रतिशोध या तंज के लिए नहीं, बल्कि पलामू की माटी का बेटा होने के नाते लिखा है। उन्होंने कहा कि लंबे राजनीतिक अनुभव वाले एक कैबिनेट मंत्री को यदि अधिकारियों के सामने लाचार दिखना पड़े, तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शीर्ष स्तर की सहमति के बिना सचिवालय में बैठे अधिकारी किसी कैबिनेट मंत्री के पत्र या निर्देश की अनदेखी करने का साहस कर सकते हैं।

‘अपमानित करने की सुनियोजित कोशिश हो रही’
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि वर्तमान गठबंधन सरकार को अनुभवी और स्वाभिमानी नेताओं की आवश्यकता नहीं रह गई है। उन्होंने दावा किया कि मंत्री राधाकृष्ण किशोर को लगातार अपमानित करने की एक सुनियोजित कोशिश की जा रही है, ताकि वे स्वयं पद छोड़ दें या फिर उन्हें सरकार से बाहर कर दिया जाए। अपने पत्र में भानु प्रताप शाही ने राधाकृष्ण किशोर से कहा कि यदि उन्हें लगातार अपमान का सामना करना पड़ रहा है, तो मंत्री पद पर बने रहने की बजाय अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हुए इस्तीफा देना बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से कम से कम पलामू और राधाकृष्ण किशोर का राजनीतिक स्वाभिमान सुरक्षित रहेगा।
‘साहसिक निर्णय लेने’ की अपील
पत्र के अंत में भानु प्रताप शाही ने उम्मीद जताई कि राधाकृष्ण किशोर उनकी बातों का गलत अर्थ नहीं निकालेंगे और अपने स्वाभिमान को सर्वोपरि रखते हुए जल्द कोई साहसिक निर्णय लेंगे। फिलहाल इस खुले पत्र पर मंत्री राधाकृष्ण किशोर या झारखंड सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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