Samachar Post रिपोर्टर, पश्चिमी सिंहभूम : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी में एक पुराने सिंचाई कुएं में गिरकर मादा हाथी की मौत हो गई। घटना दिरीबुरु पंचायत के बड़ा बालजोड़ी गांव स्थित सिंदरी गुई टोला की है। बताया जा रहा है कि करीब 22 हाथियों का झुंड धान के खेतों से गुजर रहा था। इसी दौरान एक मादा हाथी खेत के पास स्थित पानी से भरे कुएं में गिर गई। उसे बचाने के लिए झुंड के दूसरे हाथी रातभर चिंघाड़ते रहे, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। गुरुवार को वन विभाग की टीम ने दो जेसीबी की मदद से घंटों की मशक्कत के बाद हाथी के शव को कुएं से बाहर निकाला। हालांकि, शव दफनाने की जगह को लेकर ग्रामीणों और वन विभाग के अधिकारियों के बीच विवाद हो गया। ग्रामीण शव को बस्ती से दूर दफनाने की मांग पर अड़े रहे।
कुएं में गिरने के बाद रातभर चिंघाड़ता रहा हाथियों का झुंड
ग्रामीणों के अनुसार, घटना वाली रात करीब 22 हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर गांव के आसपास पहुंचा था। झुंड धान की खड़ी फसल के बीच से गुजर रहा था। इसी दौरान एक मादा हाथी खेत के पास बने पुराने सिंचाई कुएं में गिर गई। कुएं में पानी भरा होने के कारण वह बाहर नहीं निकल सकी। मादा हाथी के कुएं में गिरने के बाद झुंड के दूसरे हाथी आसपास जमा हो गए और देर रात तक चिंघाड़ते रहे। हाथियों के आक्रामक होने की आशंका के कारण ग्रामीण रात में घटनास्थल के पास नहीं जा सके। सुबह कुएं में हाथी का शव दिखाई देने पर वन विभाग को सूचना दी गई।
दो जेसीबी की मदद से घंटों बाद निकाला गया शव
सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वनपाल आलोक कुमार अपनी टीम के साथ रेस्क्यू अभियान में जुटे। लगातार बारिश, खेतों में कीचड़ और खराब रास्तों के कारण अभियान में काफी परेशानी हुई। हाथी के भारी-भरकम शव को कुएं से बाहर निकालने के लिए पहले एक जेसीबी मंगाई गई। बाद में दूसरी जेसीबी की मदद भी ली गई। घंटों की मशक्कत के बाद गुरुवार देर शाम शव को बाहर निकाला जा सका।
शव दफनाने की जगह को लेकर ग्रामीणों ने जताया विरोध
शव बाहर निकालने के बाद उसे दफनाने की जगह को लेकर ग्रामीणों और वन विभाग के अधिकारियों के बीच नोकझोंक हुई। ग्रामीणों की मांग थी कि शव को बस्ती से दूर ले जाकर दफनाया जाए। ग्रामीणों का कहना था कि हाथियों का झुंड अब भी आसपास विचरण कर रहा है। ऐसे में गांव के नजदीक शव दफनाने पर झुंड दोबारा वहां पहुंच सकता है, जिससे लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक, हाथियों का झुंड पहले ही आसपास के खेतों में धान की फसल को नुकसान पहुंचा चुका है। दूसरी ओर, देर शाम अंधेरा हो जाने के कारण शव को डंपर में लोड कर दूसरी जगह ले जाना संभव नहीं हो पाया। इस वजह से गुरुवार देर रात तक शव के निस्तारण पर सहमति नहीं बन सकी।
शुक्रवार सुबह पोस्टमार्टम कराने की तैयारी
वन विभाग के रेंजर जितेंद्र प्रसाद सिंह के अनुसार, हाथियों का झुंड धान की फसल खाते हुए खेतों की ओर बढ़ रहा था। इसी दौरान एक मादा हाथी फिसलकर पुराने सिंचाई कुएं में गिर गई। भारी बारिश और कीचड़ के कारण शव निकालने में परेशानी हुई, लेकिन टीम ने लगातार प्रयास कर उसे बाहर निकाल लिया। रेंजर ने बताया कि अंधेरा हो जाने के कारण गुरुवार को पोस्टमार्टम नहीं कराया जा सका। शुक्रवार सुबह छह बजे पोस्टमार्टम कराने की तैयारी की गई थी।






















