Samachar Post डेस्क, रांची : झारखंड के नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (NPU) में पुरानी उत्तरपुस्तिकाओं और कबाड़ की बिक्री को लेकर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि विश्वविद्यालय की रद्दी कॉपियां बिहार के चर्चित कबाड़ घोटाले के आरोपी राज किशोर गुप्ता ने खरीदी थीं। इस बिक्री में कबाड़ का वजन कम दिखाने और भुगतान में गड़बड़ी किए जाने की शिकायत सरकार से की गई है।शिकायत के मुताबिक, विश्वविद्यालय से बेचे गए कबाड़ को पांच बड़े ट्रकों में लादकर ले जाया गया। इसकी अनुमानित कीमत करीब 40 लाख रुपये बताई गई है, जबकि विश्वविद्यालय में इसके बदले केवल 3.30 लाख रुपये का चेक या ड्राफ्ट जमा किए जाने का आरोप है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच या अंतिम निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।
बिहार के कबाड़ घोटाले में आरोपी रह चुका है राज किशोर गुप्ता
राज किशोर गुप्ता को बिहार में माध्यमिक परीक्षा 2016 और इंटरमीडिएट परीक्षा 2014 व 2016 की उत्तरपुस्तिकाएं उठाने का टेंडर मिला था। आरोप है कि उसने निर्धारित अवधि से अलग वर्ष 2017 की कॉपियां भी उठा ली थीं। इस मामले में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अब NPU की रद्दी कॉपियों की खरीद में उसका नाम सामने आने के बाद विश्वविद्यालय में कबाड़ बिक्री की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
पांच ट्रकों में ले जाया गया कबाड़, भुगतान पर सवाल
सरकार को भेजी गई शिकायत में दावा किया गया है कि विश्वविद्यालय से कबाड़ की ढुलाई के लिए पांच ट्रकों का इस्तेमाल किया गया। इनमें UP67T-5644, BR02M-6063, BR02GAA-9511, BR02GAA-2827 और BR02AA-5898 नंबर के वाहन शामिल बताए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन ट्रकों से ले जाए गए कबाड़ की अनुमानित कीमत करीब 40 लाख रुपये थी, जबकि विश्वविद्यालय को केवल 3.30 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की बात कही गई है। साथ ही, कबाड़ का वजन कम दर्ज किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो इससे विश्वविद्यालय की कबाड़ बिक्री प्रक्रिया और प्राप्त राशि के हिसाब-किताब को लेकर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।
कबाड़ बिक्री समिति के सदस्य पर भी उठे सवाल
इस बिक्री प्रक्रिया से जुड़ी समिति में डॉ. गौरव श्रीवास्तव भी सदस्य थे। रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय में उन पर अन्य अनियमितताओं के आरोप भी लगे हैं। राज्यपाल के आदेश पर कराए गए विशेष ऑडिट की रिपोर्ट में भी विश्वविद्यालय से संबंधित कुछ गड़बड़ियों का उल्लेख होने की बात कही गई है। फिलहाल, रद्दी कॉपियों की बिक्री में कथित अनियमितताओं और भुगतान से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले में विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।





















