Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और विकास की मांग को लेकर 9 अक्टूबर 2026 को रांची में भाषा यात्रा निकाली जाएगी। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा की ओर से प्रस्तावित यह यात्रा मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से शुरू होगी। इसके जरिए भाषा से जुड़े शैक्षणिक, सांस्कृतिक और रोजगार के मुद्दों को सरकार के सामने रखने की तैयारी है। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने 5 अक्टूबर को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में झारखंडी भाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए सरकार के सामने कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि झारखंड की भाषाएं राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार हैं, इसलिए इनके संरक्षण के लिए ठोस नीतिगत कदम जरूरी हैं।
भाषा अकादमी और राज्य भाषा नीति की मांग
बंधु तिर्की ने झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के लिए एक सशक्त भाषा अकादमी के गठन की मांग की। इसके साथ ही सभी भाषाओं के लिए स्पष्ट और व्यापक राज्य भाषा नीति बनाने की बात कही। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय से विश्वविद्यालय स्तर तक झारखंडी भाषाओं के अध्ययन-अध्यापन के लिए पर्याप्त शिक्षकों और पदों के सृजन की मांग भी रखी। साथ ही भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए राज्य के बजट में अलग वित्तीय प्रावधान करने की मांग की गई।
शिक्षा, शोध और लोक परंपराओं के संरक्षण पर जोर
मोर्चा की ओर से विद्यालयों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में झारखंडी भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की गई है। भाषा नीति तैयार करने और उसके क्रियान्वयन में भाषा विशेषज्ञों, साहित्यकारों और भाषाविदों की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी बात कही गई। इसके अलावा लोक साहित्य, लोकगीत, लोककथाओं, लोकज्ञान और मौखिक परंपराओं के दस्तावेजीकरण एवं संरक्षण के लिए ठोस व्यवस्था बनाने की मांग रखी गई है। मोर्चा का कहना है कि भाषा संरक्षण को केवल सांस्कृतिक आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय इसे शिक्षा, शोध, रोजगार और प्रशासन से जोड़कर दीर्घकालिक नीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
आठवीं अनुसूची में अन्य झारखंडी भाषाओं को शामिल करने की मांग
बंधु तिर्की ने संथाली की तरह झारखंड की अन्य प्रमुख भाषाओं को भी संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए पहल करने की मांग की। इनमें कुड़ुख, मुंडारी, हो, खड़िया, नागपुरी, कुड़माली, खोरठा और पंचपरगनिया शामिल हैं। इसके साथ ही माध्यमिक आचार्य पद के लिए चयनित 877 अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति पत्र देने की मांग भी उठाई गई।
9 अक्टूबर को निकलेगी भाषा यात्रा
मोर्चा के मुताबिक 9 अक्टूबर को भाषा यात्रा मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से शुरू होगी। यात्रा के मार्ग को लेकर उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसमें शहर के प्रमुख इलाकों को शामिल किया गया है और इसका उद्देश्य झारखंडी भाषाओं के संरक्षण तथा भाषाई अधिकारों को लेकर जनजागरूकता बढ़ाना है। भाषा से जुड़े संगठनों के अनुसार, यह अभियान झारखंड की नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं संताली, मुंडारी, हो, कुड़ुख, खड़िया, नागपुरी, खोरठा, कुड़माली और पंचपरगनिया के संरक्षण, शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को सामने लाने का प्रयास है।





















