CGL पेपर लीक केस: पैसे देकर परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों पर शिकंजा, SIT को मास्टरमाइंड की तलाश

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड सीजीएल पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीआईडी की विशेष जांच टीम (SIT) ने कार्रवाई तेज कर दी है। जांच में ऐसे अभ्यर्थियों और उनके सहयोगियों के बारे में जानकारी सामने आई है, जिन्होंने कथित तौर पर पैसे देकर परीक्षा से पहले प्रश्नों के उत्तर हासिल किए थे। मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। जांच के दौरान SIT को कम से कम आठ अभ्यर्थियों के पैसों के लेन-देन से जुड़े सबूत मिलने की बात सामने आई है। पूछताछ में कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा से पहले उत्तर याद करवाए जाने की बात स्वीकार की है। बताया गया है कि अभ्यर्थियों ने जितने उत्तर याद रखे, उसी आधार पर परीक्षा में सवाल हल किए और बाद में सफल हुए।

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वेबल टेक्नोलॉजी के प्रतिनिधि समेत दो गिरफ्तार

मामले की जांच के दौरान SIT ने दिल्ली से वेबल टेक्नोलॉजी लिमिटेड के कोलकाता प्रतिनिधि सोमांश कुमार और उसके सहयोगी राहुल कुमार को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी अब पेपर लीक के पूरे नेटवर्क और अभ्यर्थियों तक प्रश्नों के उत्तर पहुंचाने की कड़ी को जोड़ने में जुटी है। पूछताछ के आधार पर मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

मिथिलेश सिंह को बताया जा रहा मुख्य कड़ी

जांच में ICN कंपनी के संचालक मिथिलेश सिंह का नाम सामने आया है। उसे इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी बताया जा रहा है। SIT उसकी तलाश में जुटी है। मिथिलेश सिंह के बारे में यह भी खबर सामने आई है कि वह नेपाल के रास्ते विदेश भाग सकता है। हालांकि, उसके विदेश भागने की बात की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। SIT उसके संभावित ठिकानों और संपर्कों को ट्रैक करने में जुटी है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि मिथिलेश की गिरफ्तारी के बाद कथित रैकेट में पैसों के लेन-देन, अभ्यर्थियों की संख्या और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

सैकड़ों अभ्यर्थी SIT की जांच के दायरे में

पेपर लीक मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कई अन्य अभ्यर्थियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। SIT यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर लीक प्रश्नों या उनके उत्तरों का लाभ उठाकर कितने अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास की और इनमें से कितने सरकारी नौकरी में पहुंच चुके हैं। अगर जांच में किसी अभ्यर्थी की भूमिका और फर्जी तरीके से नौकरी हासिल करने की बात साबित होती है, तो उसके खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई हो सकती है। SIT की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों से कथित तौर पर यह जानकारी मिली है कि परीक्षा से पहले पैसे के बदले उन्हें प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराए गए थे। इन आरोपियों पर पेपर लीक से फायदा उठाकर परीक्षा पास करने का आरोप है। जांच एजेंसी अब पैसों के लेन-देन, प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क तथा अभ्यर्थियों के बीच संपर्क की कड़ियां जोड़ रही है।

जांच आगे बढ़ने पर बढ़ सकता है कार्रवाई का दायरा

मामले में पहले भी गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। अब पेपर लीक के जरिए कथित तौर पर परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों की भूमिका सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। SIT यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कुल कितने लोग शामिल थे, कितने अभ्यर्थियों तक प्रश्न या उत्तर पहुंचे और इसके बदले कितनी रकम का लेन-देन हुआ। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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