जमशेदपुर में बाढ़ का खतरा घटा, लेकिन खरकई अब भी खतरे के निशान से ऊपर

Rupa Kumari | August 31, 2026 | 12:50 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, जमशेदपुर : लगातार बारिश के कारण उफनाई खरकई और स्वर्णरेखा नदियों का जलस्तर अब धीरे-धीरे घट रहा है। इससे जमशेदपुर में बाढ़ के खतरे से कुछ राहत मिली है, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। खरकई नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि निचले और तटीय इलाकों में प्रशासन की निगरानी जरूरी बनी हुई है। 31 अगस्त की सुबह 8 बजे के आंकड़ों के अनुसार, आदित्यपुर ब्रिज साइट पर खरकई नदी का जलस्तर 129.03 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 129 मीटर है। यानी नदी फिलहाल खतरे के निशान से महज 3 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इसका जलस्तर लगातार घट रहा है। 30 अगस्त की शाम 8 बजे खरकई का जलस्तर 129.21 मीटर था, जो करीब 12 घंटे में घटकर 129.03 मीटर हो गया। इस दौरान 18 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई।

स्वर्णरेखा खतरे के निशान से 1.80 मीटर नीचे

मानगो ब्रिज साइट पर स्वर्णरेखा नदी का जलस्तर 119.70 मीटर दर्ज किया गया है। यहां खतरे का निशान 121.50 मीटर है। यानी स्वर्णरेखा फिलहाल खतरे के निशान से 1.80 मीटर नीचे बह रही है। 30 अगस्त की शाम 8 बजे स्वर्णरेखा का जलस्तर 119.60 मीटर था। मामूली उतार-चढ़ाव के बावजूद फिलहाल नदी के जलस्तर का रुझान गिरावट की ओर है।

गंजिया बैराज के सभी 8 गेट खुले

बाढ़ के खतरे के बीच विभिन्न जलस्रोतों से पानी छोड़ा जाना जारी है। सोमवार सुबह गंजिया बैराज के सभी आठ गेट खुले हुए थे और वहां से 1186.54 क्यूमेक्स पानी डिस्चार्ज किया जा रहा था। इसके अलावा खरकई डैम से 55.18 क्यूमेक्स, बैंकाबाल डैम से 84.72 क्यूमेक्स और चांडिल डैम से कुल 744.57 क्यूमेक्स पानी छोड़े जाने की जानकारी है। चांडिल डैम से 729.66 क्यूमेक्स पानी नदी में और 14.91 क्यूमेक्स नहर में छोड़ा जा रहा है। वहीं, गालूडीह बराज से 1633.36 क्यूमेक्स पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया है।

बागबेड़ा और दूसरे निचले इलाकों में सतर्कता जरूरी

नदियों का जलस्तर घटने से फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन खरकई के लाल निशान से ऊपर होने और विभिन्न जलस्रोतों से पानी छोड़े जाने के कारण निचले इलाकों में सतर्कता बनाए रखना जरूरी है। बागबेड़ा, जुगसलाई, कदमा, सोनारी और शास्त्रीनगर समेत नदी किनारे के निचले इलाकों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें : सारंडा में कुइली पहाड़ी नदी के तेज बहाव में बहे 3 ग्रामीण, 2 शव बरामद; महिला लापता

अगले कुछ घंटे महत्वपूर्ण

फिलहाल स्थिति में सुधार के संकेत हैं, लेकिन अगले कुछ घंटे अहम माने जा रहे हैं। अगर लगातार बारिश होती है या ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से ज्यादा पानी आता है, तो दोनों नदियों का जलस्तर दोबारा बढ़ सकता है। इसलिए लोगों को नदी किनारे जाने और तेज जलधारा के आसपास रहने से बचने की सलाह दी गई है। फिलहाल बाढ़ का खतरा कम जरूर हुआ है, लेकिन पूरी तरह टला नहीं है। सबसे बड़ी राहत यह है कि दोनों प्रमुख नदियों का जलस्तर फिलहाल गिर रहा है।

Share this news

संबंधित खबरें