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बार-बार गैस और पेट दर्द को न करें नजरअंदाज, गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है

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  • मल में खून, वजन कम होना और फैटी लिवर दिखे तो गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से कराएं जांच : डॉ. जगदीश

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : बार-बार गैस बनना, एसिडिटी, पेट दर्द या मल में खून आने को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ये लक्षण गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल के साथ लिवर, आंत, अग्न्याशय और पित्ताशय से जुड़ी गंभीर बीमारी के संकेत भी हो सकते हैं। यह जानकारी यशोदा अस्पताल, हाईटेक सिटी के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जगदीश पोलावरापु ने मंगलवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।

बार-बार एसिडिटी और पेट दर्द पर कराएं जांच

डॉ. जगदीश ने कहा कि कभी-कभार गैस या पेट दर्द होना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि बार-बार एसिडिटी, पेट दर्द, भूख न लगना या लंबे समय तक कब्ज की समस्या रहती है तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। लगातार पेट दर्द को केवल गैस मानना सही नहीं है। इसके पीछे गैस्ट्रिक समस्या के अलावा लिवर, आंत, अग्न्याशय या पित्ताशय की बीमारी भी हो सकती है।

उन्होंने कहा कि उल्टी या मल में खून आना विशेष रूप से गंभीर संकेत है। मल में खून दिखने पर लोग अक्सर इसे बवासीर मान लेते हैं, जबकि कुछ मामलों में यह आंत के कैंसर का संकेत भी हो सकता है।

अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर मिले तो भी रहें सतर्क

डॉ. जगदीश ने कहा कि आजकल अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर के मामले काफी सामान्य हो गए हैं, लेकिन इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। फैटी लिवर मिलने पर लिवर फंक्शन टेस्ट समेत आवश्यक जांच करानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

बढ़ता मोटापा सिर्फ सुंदरता का नहीं, स्वास्थ्य का मुद्दा

उन्होंने कहा कि झारखंड समेत देश में मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मोटापा केवल वजन या दिखावे से जुड़ी समस्या नहीं है। इससे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, हृदय संबंधी समस्या और लिवर की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और वजन नियंत्रित रखना जरूरी है। धूम्रपान से पूरी तरह बचने की भी सलाह दी।

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जटिल मामलों में ही दूसरे शहर जाने की जरूरत

डॉ. जगदीश ने बताया कि रांची में सामान्य गैस्ट्रो संबंधी जांच और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। जटिल लिवर रोग, लिवर प्रत्यारोपण, गंभीर अग्न्याशय संबंधी बीमारी और उन्नत मोटापा उपचार जैसे मामलों में विशेषज्ञ केंद्र की जरूरत पड़ सकती है। यशोदा अस्पताल की ओर से रांची में प्रत्येक महीने चौथे बुधवार को परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराने की जानकारी भी उन्होंने दी।

मोटापा नियंत्रण में जीवनशैली सबसे जरूरी

उन्होंने बताया कि मोटापे के उपचार में सबसे पहले खान-पान और नियमित व्यायाम पर ध्यान देना चाहिए। जरूरत के अनुसार दवाओं और इंजेक्शन आधारित उपचार का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। गंभीर मामलों में एंडोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रोप्लास्टी जैसी तकनीक अपनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि उपचार के बाद भी नियमित व्यायाम और खान-पान में नियंत्रण बनाए रखना जरूरी है।

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