महाराष्ट्र में मराठी नहीं आने पर झारखंड-बिहार के ऑटो-टैक्सी चालकों पर कार्रवाई, लाइसेंस रद्द होने का खतरा

Meenu | August 24, 2026 | 04:21 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चलाकर रोजी-रोटी कमाने वाले झारखंड और बिहार के हजारों चालकों के सामने अब बेरोजगारी का खतरा पैदा हो गया है। महाराष्ट्र सरकार ने व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा की बुनियादी जानकारी को अनिवार्य करने की प्रक्रिया शुरू की है। मराठी नहीं सीखने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के अनुसार, जिन व्यावसायिक वाहन चालकों को मराठी का बुनियादी ज्ञान नहीं है, उन्हें पहले अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इसके बाद भी भाषा नहीं सीखने पर उनके ड्राइविंग लाइसेंस और बैज को निलंबित किया जा सकता है। निर्धारित अवधि में भी नियम का पालन नहीं करने पर परमिट और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है।

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15 अगस्त तक मराठी सीखने का दिया गया था समय

जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने पिछले महीने इस संबंध में आदेश जारी किया था। गैर-मराठी भाषी व्यावसायिक वाहन चालकों को 15 अगस्त तक मराठी सीखने का समय दिया गया था। अब विभाग ने ऐसे चालकों के खिलाफ जांच और कार्रवाई शुरू करने की बात कही है। पकड़े जाने पर चालकों को पहले एक महीने का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इस दौरान भी मराठी सीखने में विफल रहने पर ड्राइविंग लाइसेंस और बैज को तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। इसके बाद भी नियम का पालन नहीं करने पर परमिट और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।

पूरे महाराष्ट्र में चलेगा विशेष अभियान

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने बताया कि इस नियम को लागू करने के लिए पूरे महाराष्ट्र में विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रवि गायकवाड़ के नेतृत्व में संचालित होगा। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के उड़न दस्तों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। अभियान के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी।

झारखंड-बिहार के चालकों में बढ़ी चिंता

सरकार के इस फैसले से महाराष्ट्र में रहकर ऑटो और टैक्सी चलाने वाले दूसरे राज्यों के चालकों में चिंता बढ़ गई है। बड़ी संख्या में झारखंड और बिहार के लोग महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में व्यावसायिक वाहन चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। चालकों का कहना है कि भाषा की अनिवार्यता से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। वहीं, परिवहन विभाग का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसी की आजीविका छीनना नहीं, बल्कि व्यावसायिक वाहन चालकों को स्थानीय भाषा से जोड़ना है।

भाषा की ‘वर्किंग नॉलेज’ पर उठे सवाल

‘सेवा सारथी ऑटो रिक्शा टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन’ के नेता डीएम गोसावी ने कहा कि सरकार ने मराठी की ‘वर्किंग नॉलेज’ को अनिवार्य किया है, लेकिन इसकी स्पष्ट परिभाषा तय नहीं की गई है। यूनियन का कहना है कि भाषा ज्ञान के मानक स्पष्ट नहीं होने की स्थिति में RTO अधिकारियों की मनमानी और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ सकती है। सरकार की ओर से हालांकि कहा गया है कि नियम का उद्देश्य चालकों को स्थानीय भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है।

डेढ़ लाख से ज्यादा चालक सीख चुके हैं मराठी

परिवहन मंत्री के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार की ओर से कुछ महीने पहले शुरू की गई मराठी भाषा सीखने की पहल में अब तक डेढ़ लाख से अधिक व्यावसायिक वाहन चालक शामिल हो चुके हैं। सरकार इसे स्थानीय भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बता रही है।

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