झारखंड में साइबर अपराध के 2730 मामलों में सिर्फ 351 का निपटारा, कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल

Rupa Kumari | August 24, 2026 | 11:22 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और मामलों के निपटारे को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालिया समीक्षा में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक राज्य में साइबर अपराध से जुड़े 2,730 मामलों में सिर्फ 351 मामलों का निपटारा हो सका है। इस तरह 2,379 मामले अब भी लंबित हैं। इससे साइबर अपराध की जांच और मामलों के निपटारे की गति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस की ओर से साइबर अपराध के खिलाफ अभियान, गिरफ्तारियों और 1930 हेल्पलाइन के जरिए त्वरित कार्रवाई के दावे किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद मामलों के निपटारे की कम दर एक अलग तस्वीर पेश कर रही है।

ठगी की रकम रोकने की दर भी कम

वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के मामलों में ठगी की रकम को बैंक खाते में रोकने की कार्रवाई को लेकर भी झारखंड का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। समीक्षा के अनुसार Lien की औसत दर 17.23 फीसदी रही। साइबर ठगी के बाद रकम तेजी से अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर हो जाती है। ऐसे में शुरुआती घंटों में कार्रवाई और बैंकिंग संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए राज्य स्तर पर संबंधित एजेंसियों के समन्वय की व्यवस्था भी की गई है।

1930 हेल्पलाइन 24 घंटे सक्रिय

साइबर ठगी की शिकायतों के लिए संचालित 1930 हेल्पलाइन की समीक्षा में इसके 24 घंटे संचालन और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता पर जोर दिया गया है। शिकायत मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई कर ठगी की रकम को रोकने की कोशिश की जाती है। हालांकि, समीक्षा के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि शिकायतों के बाद मामलों के अंतिम निपटारे और जांच की गति में अभी सुधार की जरूरत है।

रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर हॉटस्पॉट

समीक्षा में रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर को साइबर अपराध से जुड़े म्यूल बैंक खातों और संदिग्ध गतिविधियों के लिहाज से प्रमुख हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। इसके अलावा कई जिलों में ATM कैश-आउट के हॉटस्पॉट भी सामने आए हैं, जहां साइबर ठगी से हासिल रकम को नकद निकालने की गतिविधियां होती हैं।

IMEI ब्लॉकिंग में भी पेंडेंसी

साइबर अपराध से जुड़ी तकनीकी कार्रवाई में मोबाइल और IMEI ब्लॉकिंग की व्यवस्था भी शामिल है। समीक्षा में IMEI ब्लॉकिंग समेत कुछ तकनीकी मामलों में लंबित मामलों का उल्लेख किया गया है। इसका असर साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल और दूसरे उपकरणों पर कार्रवाई की गति पर पड़ सकता है। समीक्षा के अनुसार साइबर अपराध के मामलों में अब तक 337 गिरफ्तारियां की गई हैं। वहीं, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म पर 109 मामले दर्ज किए गए हैं।

नेटग्रिड के सिर्फ 26 यूजर सक्रिय

साइबर अपराध की जांच और खुफिया जानकारी के इस्तेमाल में नेटग्रिड की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। समीक्षा के अनुसार झारखंड में कुल 49 नेटग्रिड यूजर्स हैं, लेकिन इनमें सिर्फ 26 सक्रिय हैं, जबकि 23 यूजर सक्रिय नहीं हैं। राज्य स्तर पर नेटग्रिड से जुड़े समन्वय को बेहतर बनाने के लिए वरिष्ठ स्तर के नोडल अधिकारी की भूमिका पर भी जोर दिया गया है।

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कार्रवाई के साथ तकनीकी क्षमता बढ़ाने की जरूरत

आंकड़ों से स्पष्ट है कि साइबर अपराध के खिलाफ गिरफ्तारी और शिकायत निवारण की व्यवस्था के बावजूद मामलों के निपटारे, ठगी की रकम रोकने, तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल और जांच की गति में सुधार की गुंजाइश है। विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए शुरुआती स्तर पर त्वरित कार्रवाई, बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय, तकनीकी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और लंबित मामलों के तेजी से निपटारे पर एक साथ ध्यान देना जरूरी होगा।

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