Samachar Post डेस्क, रांची : देश के प्रमुख कारोबारी समूह टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। हालांकि वे तत्काल पद नहीं छोड़ेंगे और 20 फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल में बने रहेंगे। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब 18 अगस्त को कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) प्रस्तावित है। एन चंद्रशेखरन वर्ष 2017 से टाटा संस का नेतृत्व कर रहे हैं। इससे पहले वे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रह चुके हैं। वर्ष 1987 में टाटा समूह से जुड़ने वाले चंद्रशेखरन ने अपने लगभग चार दशक लंबे करियर में समूह की कई अहम कंपनियों का नेतृत्व किया है।
इस्तीफे के बाद क्या बोले चंद्रशेखरन
इस्तीफे के बाद जारी बयान में चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा समूह के साथ 40 वर्षों का सफर उनके लिए गर्व और संतोष का विषय रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक तक टाटा संस का नेतृत्व करना सम्मान के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी रही। उन्होंने बताया कि उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होगा। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से उनके कार्यकाल को पांच वर्ष बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे कंपनी की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमिटी और बोर्ड से मंजूरी भी मिल गई थी। हालांकि, इस प्रस्ताव पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी।
कार्यकाल विस्तार को लेकर सामने आए मतभेद
सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार को लेकर टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद उभरकर सामने आए थे। बताया जा रहा है कि समूह की भविष्य की रणनीति, संभावित लिस्टिंग, बोर्ड में प्रतिनिधित्व और संचालन संबंधी विषयों पर अलग-अलग राय थी। रिपोर्टों के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच कुछ रणनीतिक मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। वहीं, बोर्ड का एक वर्ग उन्हें अगले पांच वर्षों का विस्तार देने के पक्ष में था, जबकि दूसरी ओर आयु सीमा और उत्तराधिकार योजना को लेकर अलग दृष्टिकोण सामने आया।

AGM पर टिकीं सबकी निगाहें
18 अगस्त को होने वाली AGM अब और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक में बोर्ड की संरचना, नेतृत्व परिवर्तन और समूह की भविष्य की दिशा को लेकर अहम संकेत मिल सकते हैं। साथ ही, चंद्रशेखरन के निदेशक पद पर बने रहने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
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रतन टाटा के बाद बदले नेतृत्व के समीकरण
रतन टाटा के निधन के बाद टाटा समूह में नेतृत्व, नियंत्रण और भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चाएं लगातार तेज रही हैं। ऐसे में एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा समूह के शीर्ष नेतृत्व में संभावित बदलाव का संकेत माना जा रहा है। अब उद्योग जगत की नजरें आगामी AGM और टाटा समूह के अगले नेतृत्व संबंधी फैसलों पर टिकी हैं।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

