XISS-TRI इंडिया रूरल कोलोक्वी 2026 : सरकार और समाज के बीच ज्ञान का सशक्त सेतु बनें शैक्षणिक संस्थान : शिल्पी नेहा तिर्की

Rupa Kumari | August 6, 2026 | 04:57 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की गुरुवार को एक्सआईएसएस (XISS), रांची और टीआरआई (TRI) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘इंडिया रूरल कोलोक्वी 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण भारत की वास्तविक आवश्यकताओं, स्थानीय परिस्थितियों और जनभागीदारी पर आधारित विकास का व्यवहारिक खाका तैयार कर उसे सरकार के समक्ष नीति सुझाव (पॉलिसी प्रपोजल) के रूप में प्रस्तुत करना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि किसी भी विकास प्रक्रिया की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार जनता का विश्वास होता है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का विश्वास जीतने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आम लोगों को यह भरोसा हो कि विकास योजनाएं उनकी जरूरतों, आकांक्षाओं और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं।

ग्रामीण और शहरी विकास में दिखता है स्पष्ट अंतर

मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में ग्रामीण और शहरी विकास के स्वरूप में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। शहरी क्षेत्रों में विकास अपेक्षाकृत अधिक योजनाबद्ध, समन्वित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ किया जाता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार समग्र योजना के अभाव में विकास कार्य बिखरे हुए रूप में संचालित होते हैं। उन्होंने रांची का उदाहरण देते हुए कहा कि शहरों में विकास की स्पष्ट दिशा और योजना दिखाई देती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसी प्रकार के समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

शोध आधारित सुझावों से मजबूत होंगी नीतियां

शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि ग्रामीण विकास की चुनौतियों का समाधान केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। शैक्षणिक संस्थानों, शोध संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की भी इसमें समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों को स्थानीय परिस्थितियों का गहन अध्ययन कर व्यवहारिक, वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित सुझाव सरकार तक पहुंचाने चाहिए, ताकि नीतियां अधिक प्रभावी बन सकें और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।

सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बने मजबूत ज्ञान सेतु

मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि सरकार और शैक्षणिक संस्थानों के बीच ज्ञान का एक मजबूत सेतु स्थापित करने की आवश्यकता है। संस्थानों की भूमिका केवल शोध और अध्ययन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें समाज की वास्तविक समस्याओं की पहचान कर उनके व्यावहारिक समाधान नीति-निर्माताओं के समक्ष प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे नीति निर्माण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के बीच मौजूद दूरी को कम किया जा सकेगा और विकास योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंच सकेगा।

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XISS से जताई विशेष अपेक्षा

शिल्पी नेहा तिर्की ने विशेष रूप से एक्सआईएसएस (XISS) जैसे संस्थानों से अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि वे सरकार और समाज के बीच ज्ञान-साझेदारी को और अधिक सशक्त बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रकार के संवाद, शोध और विचार-विमर्श आधारित प्रयास ग्रामीण भारत के समावेशी, टिकाऊ और जनकेंद्रित विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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