शिबू सोरेन की पुण्यतिथि पर केशव महतो कमलेश ने किया नमन, बोले- गुरुजी सादगी और संघर्ष के प्रतीक थे

Meenu | August 3, 2026 | 01:00 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने झारखंड आंदोलन के महानायक, पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गुरुजी का पूरा जीवन सादगी, संघर्ष और जनसेवा का प्रतीक रहा। उन्होंने कहा कि 4 अगस्त केवल एक पुण्यतिथि नहीं, बल्कि झारखंड के लिए आत्ममंथन और नए संकल्प का दिन है।

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संघर्षों से निकले जननायक

केशव महतो कमलेश ने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन संघर्षों की एक प्रेरणादायक मिसाल है। महाजनी प्रथा और सूदखोरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले उनके पिता सोबरन सोरेन की हत्या के बाद भी उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना और आदिवासियों, किसानों तथा मजदूरों के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जनता ने उनके इसी संघर्ष और समर्पण के कारण उन्हें स्नेहपूर्वक ‘दिशोम गुरु’ की उपाधि दी।

सादगी और जनसेवा की मिसाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे सर्वोच्च पद पर रहने के बावजूद शिबू सोरेन की सादगी कभी नहीं बदली। वे हमेशा आम लोगों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनते थे और मानते थे कि जनता के बीच रहकर ही उनकी वास्तविक परेशानियों को समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि गुरुजी का पूरा जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति के अधिकार, सम्मान और स्वाभिमान के लिए समर्पित रहा।

अलग झारखंड राज्य निर्माण में अहम भूमिका

केशव महतो कमलेश ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के गठन में शिबू सोरेन का योगदान ऐतिहासिक रहा। उन्होंने अलग राज्य की मांग को केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक अस्मिता का आंदोलन बनाया, जिसके परिणामस्वरूप 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन संभव हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2026 में भारत सरकार द्वारा शिबू सोरेन को लोक सेवा के क्षेत्र में मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना उनके राष्ट्रीय योगदान की महत्वपूर्ण पहचान है।

गुरुजी के आदर्शों पर चलने का संकल्प

केशव महतो कमलेश ने कहा कि झारखंड प्रदेश कांग्रेस परिवार गुरुजी के बताए मार्ग पर चलने और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लेता है। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन के विचार, संघर्ष और जनसेवा की भावना सदैव झारखंड की आत्मा में जीवित रहेंगे।

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