Samachar Post रिपोर्टर, गिरिडीह : गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड अंतर्गत थानसिंहडीह पंचायत के बड़की लतबेधवा गांव में एक आदिवासी परिवार आज भी सरकारी आवास योजना का लाभ मिलने का इंतजार कर रहा है। परिवार का दावा है कि लाभुक सूची में नाम शामिल होने के बावजूद उन्हें अब तक आवास उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिसके कारण वे विद्यालय के एक कमरे में रहने को मजबूर हैं।
जर्जर घर छोड़ स्कूल में लेने पड़ी शरण
गांव निवासी पत्नी सोरेन ने बताया कि उनका खपरैल मकान वर्षों पहले क्षतिग्रस्त हो गया था। बरसात के दौरान घर में रहना मुश्किल हो गया, जिसके बाद उन्हें अपने पति और बच्चों के साथ गांव के विद्यालय के एक कमरे में शरण लेनी पड़ी। उन्होंने बताया कि परिवार की आय का मुख्य स्रोत मजदूरी है। सीमित आमदनी के कारण नया घर बनवाना संभव नहीं हो सका। कर्ज लेकर पुराने मकान की मरम्मत कराई गई, लेकिन हर बारिश में छत टपकने लगती है और रहने की समस्या फिर खड़ी हो जाती है।

लाभुक सूची में नाम, लेकिन नहीं मिला लाभ
पत्नी सोरेन के अनुसार, उनका नाम आवास योजना की लाभुक सूची में शामिल किया गया था। इससे परिवार को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही उन्हें पक्का मकान मिलेगा और स्कूल के कमरे में रहने की मजबूरी खत्म होगी। हालांकि उनका आरोप है कि सूची में नाम आने के बावजूद अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला। परिवार का कहना है कि कई वर्षों से वे आवास मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

पशु शेड दिलाने के नाम पर ठगी का आरोप
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि एक व्यक्ति ने मनरेगा के तहत पशु शेड दिलाने और उसमें रहने की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया था। इसके बदले उनसे ₹10,000 लिए गए, लेकिन न तो पशु शेड मिला और न ही राशि वापस की गई। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस विद्यालय का कमरा बच्चों की पढ़ाई के लिए होना चाहिए, वह आज एक परिवार का अस्थायी आश्रय बना हुआ है। उनका मानना है कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब पात्र लाभार्थियों को समय पर सुविधाएं मिलें।
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प्रशासन से कार्रवाई की मांग
पत्नी सोरेन ने प्रशासन और संबंधित विभाग से उनके मामले की जांच कर शीघ्र आवास उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए एक सुरक्षित पक्का घर चाहिए, ताकि विद्यालय का कमरा फिर से केवल शिक्षा के उद्देश्य से उपयोग किया जा सके। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर पात्र परिवार को जल्द से जल्द आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।





















