कोडरमा सदर अस्पताल में आउटसोर्स कर्मियों की हड़ताल का असर, परिजनों को खुद ट्रॉली पर ले जाना पड़ा शव

Meenu | July 27, 2026 | 02:49 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,कोडरमा : झारखंड के कोडरमा सदर अस्पताल में आउटसोर्स कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। ट्रॉलीमैन समेत सभी आउटसोर्स कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने के कारण अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई। स्थिति ऐसी बन गई कि पोस्टमार्टम के लिए मृतक का शव ले जाने वाला कोई कर्मचारी उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते परिजनों को खुद ट्रॉली पर शव रखकर पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाना पड़ा।

यह भी पढ़ें : कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर भाजपा का हमला, CBI जांच की मांग दोहराई

हड़ताल से प्रभावित हुई अस्पताल की व्यवस्था

जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत ट्रॉलीमैन सहित सभी आउटसोर्स कर्मी अपनी लंबित मांगों को लेकर 23 जुलाई 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण अस्पताल में कई आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इसी बीच एक संवेदनशील तस्वीर सामने आई, जब काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा तो परिजनों ने स्वयं शव को ट्रॉली पर रखकर पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचाया।

छह महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप

झारखंड स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग कर्मचारी संघ का आरोप है कि आउटसोर्सिंग कंपनी कमांडो इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स, हजारीबाग के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को पिछले छह महीने से मानदेय नहीं मिला है। संघ का कहना है कि इस कारण कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट और भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो गई है।

वेतन भुगतान में अनियमितता का आरोप

संघ के अनुसार, सरकार एक तकनीकी आउटसोर्स कर्मचारी के लिए कंपनी को लगभग ₹26,000 प्रति माह का भुगतान करती है, जबकि कर्मचारियों को केवल ₹12,000 से ₹12,600 प्रतिमाह ही मिलते हैं। संगठन का आरोप है कि वेतन भुगतान में भारी असमानता है और लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों को मजबूर होकर हड़ताल करनी पड़ी।

“प्रशासन की लापरवाही से बनी स्थिति”

कर्मचारी संघ का कहना है कि अस्पताल में उत्पन्न हुई यह स्थिति कर्मचारियों की इच्छा से नहीं, बल्कि प्रशासन द्वारा समय पर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देने का परिणाम है। उनका कहना है कि यदि समस्याओं का समय रहते समाधान कर दिया जाता, तो मरीजों और मृतकों के परिजनों को इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।

Share this news

संबंधित खबरें