हजारीबाग: दो सप्ताह बाद भी नहीं मिला मृत्यु प्रमाण पत्र, चौपारण CHC पर लापरवाही के आरोप

Meenu | July 10, 2026 | 03:42 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,हजारीबाग : सड़क दुर्घटना में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत के बाद सरकारी व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं। उत्तर प्रदेश से आए एक परिवार ने चौपारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि घटना के लगभग दो सप्ताह बीत जाने के बावजूद उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिला, जिससे कई जरूरी कानूनी और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

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सड़क दुर्घटना के बाद इलाज के दौरान हुई थी मौत

जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश निवासी रविशंकर राम 25 जून को दनुआ घाटी में हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए चौपारण सीएचसी लाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

आवेदन के बाद भी नहीं मिला प्रमाण पत्र

मृतक के पिता दौलत राम का आरोप है कि उन्होंने 27 जून को सीएचसी प्रभारी को लिखित आवेदन देकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद अब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया। उनका कहना है कि मृत्यु प्रमाण पत्र के अभाव में बीमा दावा, बैंक संबंधी कार्य, सरकारी सहायता और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं।

‘एक टेबल से दूसरी टेबल तक दौड़ाया गया’

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन और संबंधित चिकित्सक जिम्मेदारी तय करने के बजाय एक-दूसरे पर जवाबदेही डालते रहे। हर बार उन्हें केवल आश्वासन मिला, लेकिन प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया। उनका कहना है कि दुख की घड़ी में प्रशासन से सहयोग मिलने के बजाय उन्हें लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े।

रिकॉर्ड प्रबंधन पर भी उठे सवाल

परिवार ने अस्पताल के रिकॉर्ड प्रबंधन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि अस्पताल में अभिलेखों का सही तरीके से संधारण होता और प्रक्रिया समय पर पूरी की जाती, तो उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। उनके अनुसार यह मामला केवल एक परिवार की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

जांच और कार्रवाई की मांग

पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और तत्काल मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की है। अब इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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