झारखंड की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: 125 सरकारी स्कूलों में एक भी छात्र नहीं, 43 शिक्षक अब भी तैनात

Meenu | July 10, 2026 | 11:56 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य में 125 ऐसे सरकारी विद्यालय हैं, जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है, लेकिन इन स्कूलों में 43 शिक्षक अब भी पदस्थापित हैं। इन शिक्षकों के वेतन पर सरकार हर महीने करीब 15 लाख रुपये से अधिक खर्च कर रही है। यह खुलासा यू-डायस (UDISE) 2025-26 की रिपोर्ट में हुआ है, जिससे सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन और संसाधनों के उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं।

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एक साल में 16% बढ़े शून्य नामांकन वाले स्कूल

यू-डायस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में राज्य में ऐसे स्कूलों की संख्या 107 थी, जहां एक भी छात्र नहीं था। वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 125 हो गया। यानी एक वर्ष में ऐसे स्कूलों की संख्या में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि कई क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों से विद्यार्थियों का रुझान लगातार कम हो रहा है।

9,827 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे

रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में 9,827 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक कार्यरत है। इन विद्यालयों में कुल 4,40,346 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। अधिकांश एकल शिक्षक वाले विद्यालय प्राथमिक स्तर के हैं, जहां कक्षा 1 से 5 तक के सभी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी एक ही शिक्षक पर है। इससे शिक्षण की गुणवत्ता और बच्चों के समुचित शैक्षणिक विकास पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

दो साल में तेजी से बढ़े एकल शिक्षक वाले विद्यालय

यू-डायस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में राज्य में 7,642 एकल शिक्षक वाले स्कूल थे, जिनमें 3,78,898 छात्र नामांकित थे। वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 9,178 स्कूल और 4,36,480 विद्यार्थियों तक पहुंच गई। वहीं 2025-26 में 9,827 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे 4,40,346 विद्यार्थियों की पढ़ाई चल रही है।

12 हजार नियुक्तियों के बाद भी 50 हजार पद खाली

राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के लिए करीब 12 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की है। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसकी प्रमुख वजह बड़ी संख्या में शिक्षकों का सेवानिवृत्त होना और उनके स्थान पर समय पर नई नियुक्तियां नहीं होना बताया जा रहा है। वर्तमान में झारखंड में करीब 50 हजार शिक्षक पद रिक्त हैं।

शिक्षा विभाग ने जिलों से मांगी रिपोर्ट

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने पिछले वर्ष सभी जिलों को शून्य नामांकन वाले विद्यालयों की समीक्षा करने और उनकी वास्तविक आवश्यकता का आकलन करने का निर्देश दिया था। विभाग ने ऐसे विद्यालयों के संचालन को लेकर रिपोर्ट भी मांगी थी। हालांकि, ताजा यू-डायस रिपोर्ट बताती है कि इस दिशा में अब तक अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है।

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