भूपेंद्र यादव के चार स्टाफ सदस्यों को हटाने पर कांग्रेस का हमला, सरिस्का खनन मामले से जोड़ा

Rupa Kumari | July 9, 2026 | 01:33 PM IST

Samachar Post डेस्क, रांची : केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के चार प्रमुख स्टाफ सदस्यों को हटाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को संभावित घोटाले से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया है कि यह मामला राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व की सीमाओं में बदलाव और उससे खनन कंपनियों को संभावित लाभ पहुंचाने से जुड़ा हो सकता है।

कांग्रेस ने उठाए फैसले पर सवाल

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जून 2025 से पर्यावरण मंत्रालय और राजस्थान सरकार द्वारा सरिस्का के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट की सीमाओं को पुनर्निर्धारित करने की कोशिशें की जा रही थीं। उनके अनुसार, यदि यह बदलाव लागू होता तो 50 से अधिक खनन कंपनियों को लाभ मिल सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री के निजी सचिव और अतिरिक्त निजी सचिव स्तर के अधिकारियों को हटाने के पीछे इसी कथित मामले की कड़ी हो सकती है। कांग्रेस का कहना है कि पूरे प्रकरण में बड़े स्तर पर जांच की आवश्यकता है।

अरावली क्षेत्र को लेकर भी जताई चिंता

कांग्रेस नेता ने कहा कि 20 सितंबर 2025 को भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) ने पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखकर अरावली पर्वतमाला की पुनर्परिभाषा का विरोध किया था। FSI का मानना था कि इस तरह का कदम अरावली क्षेत्र को खनन और रियल एस्टेट विकास के लिए अधिक खुला बना सकता है। जयराम रमेश के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी और एमिकस क्यूरी ने भी FSI के रुख का समर्थन किया था। इसके बावजूद मंत्रालय पुनर्परिभाषा के पक्ष में बना रहा।

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बड़ी गड़बड़ी की आशंका

कांग्रेस का आरोप है कि मंत्री के चार करीबी सहयोगियों को अचानक हटाए जाने से पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है। जयराम रमेश ने कहा कि घटनाक्रम यह संकेत देता है कि निर्णय प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी रही है। हालांकि, केंद्र सरकार या पर्यावरण मंत्रालय की ओर से अभी तक कांग्रेस के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की वास्तविक वजह और तथ्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

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